मंडला: कान्हा के जंगल में अभी कदमों की आहट और दहाड़ सुनने की उम्र ही थी, लेकिन नन्ही ‘प्रिंसेस’ की जिंदगी अचानक थम गई। करीब 11 महीने की मादा बाघ शावक जंगल में मृत मिली तो वनकर्मियों से लेकर वन्यजीव प्रेमियों तक हर कोई स्तब्ध रह गया। शरीर पर संघर्ष के निशान मिले हैं। और शुरुआती जांच में आपसी भिड़ंत को मौत की वजह माना जा रहा है। अब फॉरेंसिक जांच बताएगी कि जंगल की इस मासूम ‘प्रिंसेस’ की आखिरी लड़ाई किससे और कैसे हुई।
कान्हा परिक्षेत्र की नक्तीघाटी बीट के कक्ष क्रमांक 138 में सोमवार सुबह गश्त के दौरान वनकर्मियों को बाघ के पदचिन्ह और रक्त के निशान दिखाई दिए। इसके बाद आसपास के इलाके में सघन तलाशी शुरू की गई। खोजबीन के दौरान गश्ती दल को एक बाघ शावक का शव मिला। इसकी सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई। अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल के साथ आसपास के क्षेत्र की घेराबंदी कराई गई।
डॉग स्क्वायड से भी कराई गई जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने डॉग स्क्वायड की मदद से आसपास के क्षेत्र में जांच कराई। इसके बाद वरिष्ठ वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संदीप अग्रवाल और पशु चिकित्सक डॉ. ललित चौरसिया की टीम ने मृत शावक का परीक्षण किया। जांच में शावक की उम्र करीब 11 माह और लिंग मादा पाया गया। उसके शरीर पर दूसरे वन्यजीव के साथ संघर्ष के निशान मिले।
आपसी संघर्ष को माना जा रहा संभावित कारण
शरीर पर मिले चोट और संघर्ष के निशानों के आधार पर पशु चिकित्सकों ने प्रारंभिक तौर पर आपसी संघर्ष के कारण मौत होने की संभावना जताई है। हालांकि वन विभाग ने मृत्यु के कारण की पुष्टि के लिए शव परीक्षण के दौरान फॉरेंसिक जांच के लिए जरूरी नमूने भी सुरक्षित किए हैं। इन नमूनों की जांच के बाद मौत की वजह से जुड़े अन्य पहलुओं की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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NTCA प्रोटोकॉल के तहत किया अंतिम संस्कार
घटना के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत मौके की जांच, दस्तावेजीकरण और अन्य जरूरी कार्रवाई पूरी की गई। इसके बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के मानक प्रोटोकॉल के अनुसार मृत बाघ शावक का अंतिम संस्कार किया गया।वहीं जब शावक का अंतिम संस्कार किया रहा था तो प्रशासन ने सभी मीडिया कर्मियों को इससे दूर रखा।

