उत्तराखंड: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से है। सरकार का प्रयास है कि विकास के साथ विरासत का संरक्षण हो और प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को आधुनिक सुविधाओं के साथ नई ऊंचाई दी जाए। उन्होंने कहा कि आदर्श चम्पावत के संकल्प के तहत जनपद की धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता, लोक संस्कृति और पर्यटन संभावनाओं को आधुनिक विकास से जोड़कर एक प्रभावी विकास मॉडल तैयार किया जा रहा है।
सीएम ने दशहरा महोत्सव में प्रतिभाग किया
मुख्यमंत्री टनकपुर में नवयुवक रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित दशहरा महोत्सव में प्रतिभाग कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास और विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। उत्तराखण्ड भी विकसित भारत के संकल्प में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रहा है। राज्य में विकास के साथ-साथ धार्मिक स्थलों, मंदिरों, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चम्पावत को नई ऊंचाई देने का संकल्प
सीएम धामी ने कहा कि आदर्श चम्पावत का संकल्प केवल विकास कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चम्पावत की पहचान और संभावनाओं को नई ऊंचाई देने का संकल्प है। टनकपुर में लगभग 237.74 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन आईएसबीटी, शारदा घाट का पुनर्विकास एवं सौंदर्यीकरण, गोल्ज्यू कॉरिडोर, मां पूर्णागिरि क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं का विस्तार तथा विभिन्न मंदिरों के सौंदर्यीकरण जैसे कार्य जनपद के विकास को नई गति प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मां पूर्णागिरि धाम आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ककराली गेट से धाम की ओर लगभग 8.10 करोड़ रुपये की लागत से प्रकाश व्यवस्था विकसित की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि मां पूर्णागिरि धाम सहित जनपद के अन्य धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हों।
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योजनाओं का लाभ समाज के हर व्यक्ति को मिले
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। चम्पावत की प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पर्यटन क्षमता को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ते हुए ऐसा विकास सुनिश्चित किया जा रहा है, जिसमें विकास की गति के साथ विरासत की गरिमा भी बनी रहे।

