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त्विषा शर्मा केस: समर्थ सिंह को नहीं मिली डिफॉल्ट बेल, कोर्ट ने कहा- 90 दिन में सीबीआई ने दाखिल किया चालान

भोपाल। मॉडल एवं एक्ट्रेस त्विषा शर्मा की मौत के मामले में आरोपी समर्थ सिंह को भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय से फिलहाल डिफॉल्ट जमानत नहीं मिल सकी। सोमवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शोभना भलावे ने समर्थ सिंह की वैधानिक जमानत (डिफॉल्ट बेल) याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि सीबीआई ने कानून में निर्धारित 90 दिन की अवधि के भीतर चालान पेश कर दिया था। इसलिए आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं बनता।

अदालत के आदेश के मुताबिक, सीबीआई ने 17 अगस्त को चालान पेश किया था और संबंधित अदालत इस पर संज्ञान भी ले चुकी है। समर्थ सिंह को 23 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था। इस तरह गिरफ्तारी के 90 दिन पूरे होने से पहले ही जांच एजेंसी ने चालान दाखिल कर दिया था।

माता-पिता की ओर से जमानत का विरोध

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जांच एजेंसी द्वारा चालान पेश करने और अदालत द्वारा उस पर संज्ञान लेने के बाद केवल कुछ दस्तावेजों के रिकॉर्ड पर नहीं होने या किसी सह-आरोपी के खिलाफ जांच जारी रहने के आधार पर चालान को अधूरा नहीं माना जा सकता।

सीबीआई की दलील थी कि यदि चालान के साथ कुछ दस्तावेज तत्काल रिकॉर्ड पर उपलब्ध नहीं हैं, तो इससे चालान अमान्य नहीं हो जाता। अदालत द्वारा चालान पर संज्ञान लिए जाने के बाद आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का अधिकार नहीं रहता।

त्विषा शर्मा के माता-पिता की ओर से अधिवक्ता अंकुर पांडे ने भी जमानत याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने निर्धारित 90 दिन की अवधि के भीतर चालान दाखिल कर दिया है और अदालत उस पर संज्ञान भी ले चुकी है।

बचाव पक्ष ने कहा- जांच अभी अधूरी

समर्थ सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजय गुप्ता ने दलील दी कि सीबीआई ने चालान तो पेश कर दिया, लेकिन जांच को जानबूझकर अधूरा रखा गया है, ताकि आरोपी को डिफॉल्ट जमानत का लाभ न मिल सके।

बचाव पक्ष ने कहा कि 17 अगस्त को सीबीआई की ओर से दाखिल रिपोर्ट अंतिम जांच रिपोर्ट नहीं थी और मामले में जांच अभी जारी है। इसी आधार पर दलील दी गई कि 90 दिन की निर्धारित अवधि में जांच पूरी नहीं हुई, इसलिए समर्थ सिंह को वैधानिक जमानत (डिफॉल्ट बेल) का लाभ दिया जाना चाहिए।

हालांकि अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और सीबीआई द्वारा 90 दिन की अवधि के भीतर चालान पेश किए जाने तथा उस पर अदालत के संज्ञान को आधार मानते हुए डिफॉल्ट जमानत की याचिका खारिज कर दी।

 

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