आठ उम्मीदवारों की सूची में संगठन और सामाजिक समीकरण का संतुलन, पुराने चेहरों को किनारे कर नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिश
नई दिल्ली/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के चुनाव के लिए भाजपा ने सोमवार को आठ उम्मीदवारों की घोषणा की। पहली नजर में यह सूची उच्च सदन का गणित साधती दिखती है, लेकिन इसके पीछे 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव की राजनीतिक बिसात भी साफ दिखाई देती है। पार्टी ने उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण, संगठनात्मक निष्ठा और क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश की है।
भाजपा ने अपने मौजूदा आठ राज्यसभा सदस्यों में से किसी को दोबारा मौका नहीं दिया। केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह जैसे पश्चिमी यूपी के प्रभावशाली चेहरों को भी सूची से बाहर रखा गया है। इसके उलट पशुधन मंत्री धर्मपाल को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने का संकेत दिया है।
पुराने काडर पर भरोसा, सामाजिक समीकरण भी साधे
आठ उम्मीदवारों में अधिकांश की राजनीतिक पहचान भाजपा संगठन से बनी है। गोपीकृष्ण पांडेय, राधाकांत ओझा, धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर और रामप्रताप सिंह जैसे नामों के जरिए पार्टी ने पुराने और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि संगठन में लंबे समय तक काम करने वालों के लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुले हैं।
वहीं प्रियंका सिंह रावत और श्रुति कटियार को अपेक्षाकृत नए चेहरों के रूप में देखा जा रहा है। सामाजिक समीकरण की बात करें तो तीन अगड़े, तीन पिछड़े और दो दलित चेहरों के जरिए भाजपा ने अपने पारंपरिक सवर्ण आधार के साथ ओबीसी और दलित मतदाताओं को भी साधने की कोशिश की है।
पश्चिमी यूपी में नेतृत्व परिवर्तन का संकेत
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लोधी समाज के नेतृत्व को लेकर बीएल वर्मा और राजवीर सिंह के बीच राजनीतिक दूरी और वर्चस्व की चर्चाएं रही हैं। बीएल वर्मा को कभी कल्याण सिंह का करीबी माना जाता था, जबकि राजवीर सिंह अपने पिता की राजनीतिक विरासत के स्वाभाविक दावेदार माने जाते हैं। ऐसे में दोनों को राज्यसभा से बाहर रखना महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
इसके विपरीत आंवला से कई बार विधायक रहे धर्मपाल को राज्यसभा भेजना पश्चिमी यूपी में लोधी समाज के बीच नेतृत्व का नया चेहरा आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
श्रुति के चयन से परिवारवाद पर सवाल
झारखंड के राज्यपाल और बरेली से कई बार सांसद रहे संतोष गंगवार की पुत्री श्रुति कटियार का चयन भाजपा के परिवारवाद विरोधी रुख पर सवाल खड़े करता है। हालांकि उनकी संगठनात्मक पृष्ठभूमि को देखते हुए पार्टी इसे अलग तरीके से देख सकती है। साथ ही, उनके चयन को पश्चिमी यूपी के कुर्मी समाज को साधने की कोशिश से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
2027 के साथ 2029 पर नजर
राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची से भाजपा ने स्पष्ट संकेत दिया है कि 2027 का विधानसभा चुनाव उसके लिए तत्काल लक्ष्य है, लेकिन रणनीति 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर भी बनाई जा रही है। अगड़ों की संभावित नाराजगी थामने के साथ पिछड़ों और दलितों को प्रतिनिधित्व का भरोसा देना इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। संदेश साफ है-संगठन में निष्ठा, सामाजिक संतुलन और चुनावी उपयोगिता, तीनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश।

