कोलकाता: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर बवाल और बढ़ गया है। अब सवाल चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल पर ही खड़े हो गए हैं। वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद अपील सुन रहे ट्रिब्यूनल के जजों ने ही पोर्टल में कई खामियां गिना दी हैं।
जजों ने गिनाई पोर्टल की कमियां
11 अगस्त को हुई बैठक में एक दर्जन से ज्यादा जजों ने बताया कि पोर्टल पर कई जरूरी सुविधाएं ही नहीं हैं। जैसे – संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करना, वोटर्स के एक्स्ट्रा डॉक्यूमेंट अपलोड करना, वर्चुअल सुनवाई करना और पात्र पाए जाने पर हटाया गया नाम दोबारा जोड़ना। इतना ही नहीं अपील करने वाले व्यक्ति के लिए ट्रिब्यूनल का ऑर्डर डाउनलोड करने में भी दिक्कत आ रही है। ये सभी मुद्दे चुनाव आयोग और कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तक पहुंचाए गए हैं।
यह भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन: राहुल-प्रियंका आकाशवाणी कैंपस में धरने पर बैठे
27 लाख से ज्यादा वोटर्स के नाम हटे
बंगाल में SIR के दौरान करीब 27.16 लाख वोटर्स के नाम फाइनल लिस्ट से हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रभावित लोगों की अपील सुनने के लिए 19 सिंगल-मेंबर ट्रिब्यूनल बनाए गए थे, जिनमें रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को रखा गया है।
चुनाव आयोग ने सितंबर में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि कुल 38.31 लाख अपीलें आई हैं। इनमें 22.21 लाख अपीलें नाम काटने के खिलाफ हैं, जबकि 16.10 लाख अपीलें लिस्ट में शामिल नामों को चुनौती देने वाली हैं। 10 सितंबर तक सिर्फ 1.26 लाख मामलों का ही निपटारा हो पाया था।

