उज्जैन: श्राद्ध पक्ष की चतुर्दशी पर शुक्रवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अंकपात स्थित गयाकोठा और भैरवगढ़ क्षेत्र के सिद्धनाथ घाट पर सुबह 4 बजे से ही लोग अपने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्धकर्म करने पहुंचे।धार्मिक मान्यता के अनुसार, अंकपात स्थित गयाकोठा का महत्व बिहार के गया तीर्थ के समान माना जाता है। यहां भगवान विष्णु और सप्त ऋषियों के चरण स्थित हैं। श्रद्धालुओं ने दूध अर्पित कर विधि-विधान से पितृ कर्म संपन्न किए। चतुर्दशी के अवसर पर दोनों स्थलों पर सुबह से ही धार्मिक गतिविधियां जारी रहीं।
4 बजे खुले मंदिर के पट
सिद्धनाथ घाट पर सुबह 4 बजे भगवान सिद्धवट मंदिर के पट खोले गए। सबसे पहले पुजारी मंडली ने श्रद्धालुओं और उनके पूर्वजों की आत्मशांति, जनकल्याण और सृष्टि कल्याण के लिए पूजा-अर्चना की। इसके बाद श्रद्धालुओं ने निर्धारित पात्र में दूध अर्पित कर भगवान सिद्धवट का दुग्ध अभिषेक किया।
दुग्ध अभिषेक के लिए घंटों तक इंतजार करना पड़ा
दुग्ध अभिषेक के लिए श्रद्धालुओं को दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। दूध अर्पित करने के लिए करीब एक किमी लंबी लाइन लगी। हजारों लोगों ने पूर्वजों की आत्मशांति के लिए तर्पण और पिंडदान भी किया। दुग्ध अभिषेक और श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शयन आरती तक रात 9 बजे तक चलेगा।
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अकाल मृत्यु होने पर चतुर्दशी श्राद्ध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चतुर्दशी तिथि पर उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु असामान्य या विशेष परिस्थितियों में हुई हो। द्रिक पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर 2026 की रात 10:15 बजे शुरू हुई और 9 अक्टूबर 2026 की रात 9:35 बजे तक रहेगी। इसी कारण 9 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद्ध किया जा रहा है।

