भोपाल: मध्यप्रदेश में कथित आबकारी घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नाइट क्लब, रेस्टोरेंट और रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े करीब एक हजार करोड़ रुपये के कथित घोटाले में कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। ऐसे में सरकार को स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर सच्चाई सामने लानी चाहिए।
अधिकारियों पर एक करोड़ रुपये लेने के आरोप
जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि कथित घोटाले के आरोपी मोहित गोगिया ने जांच एजेंसियों को दिए बयान में कई अधिकारियों और कारोबारियों के नाम लिए हैं। पटवारी के मुताबिक, गोगिया ने पूर्व आईएएस अधिकारी सी.पी. रायचुरा और तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त टी.पी. रायचुरा पर वर्ष 2024-25 में शराब दुकानों के ठेके दिलाने और टेंडर जारी करने के बदले कथित तौर पर एक करोड़ रुपये लेने के आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि इन आरोपों से प्रदेश की आबकारी व्यवस्था और सरकारी ठेकों के आवंटन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि शराब दुकानों के ठेके नियमों के अनुसार दिए गए या इसमें किसी तरह का प्रभाव और लेन-देन शामिल था। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें
जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से पूरे मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग करते हुए पांच प्रमुख बिंदु रखे हैं।
1. स्वतंत्र SIT का गठन किया जाए: पूरे कथित आबकारी घोटाले की जांच हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र विशेष जांच दल से कराई जाए, ताकि जांच पर किसी तरह का दबाव न रहे।
2. शराब ठेकों और टेंडर प्रक्रिया की जांच हो: वर्ष 2024-25 में शराब दुकानों के आवंटन, टेंडर प्रक्रिया, बैंक FDR और ठेकेदारों से जुड़े सभी दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए।
3. संदिग्ध बैंक खातों की जांच की जाए: कथित तौर पर 50-50 लाख रुपये के भुगतान और अन्य संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े बैंक खातों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कराई जाए।
4. जांच से जुड़े साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं: पूरे मामले के दस्तावेज और जरूरी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की भूमिका से जांच प्रभावित होने की आशंका हो, उनकी भूमिका की नियमानुसार समीक्षा की जाए।
5. जांच की समय-सीमा तय हो: जांच पूरी करने की समय-सीमा निर्धारित की जाए और उसकी प्रगति सार्वजनिक की जाए। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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जनता को आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए
जीतू पटवारी ने कहा कि भ्रष्टाचार के इतने गंभीर आरोप सामने आने के बाद सरकार की चुप्पी और केवल औपचारिक सफाई देना पर्याप्त नहीं है। प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी ठेकों के आवंटन में किसी तरह की गड़बड़ी हुई है या नहीं।
उन्होंने कहा कि सरकार की विश्वसनीयता केवल बयान देने से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और कार्रवाई से साबित होगी। यदि सरकार पारदर्शिता की बात करती है, तो उसे पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
फिलहाल कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से जल्द SIT गठित करने और जांच की स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

