वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशंका जताई है कि ईरान तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले कोई बड़ा कदम उठा सकता है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान को लग सकता है कि ऐसा करने से अमेरिकी चुनाव पर असर पड़ेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका चाहे तो स्थिति को बहुत जल्दी समाप्त कर सकता है। उनके बयान से पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच कूटनीति और सैन्य कार्रवाई, दोनों की संभावनाएं चर्चा में आ गई हैं।
टेनेसी के क्लार्क्सविल में मध्यावधि चुनाव के लिए आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान फिलहाल शांत होता दिखाई दे रहा है, लेकिन चुनाव से पहले वह कुछ अतिरिक्त कदम उठा सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान ऐसा करके अमेरिका को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान को इस बात का अंदाजा नहीं है कि उन्होंने अब तक उसके प्रति कितना संयम बरता है।
ईरान पर तत्काल हमले से इनकार, बातचीत जारी रखने का दावा
इससे पहले ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिका तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने इसके पीछे दोनों देशों के बीच जारी बातचीत का हवाला दिया था। गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत चल रही है।
ट्रंप ने ईरान की आर्थिक और सैन्य स्थिति को कमजोर बताते हुए अमेरिकी नाकेबंदी जारी रखने की बात भी कही। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही का उल्लेख करते हुए दावा किया कि एक रात में इस मार्ग से 2.2 करोड़ बैरल तेल का परिवहन हुआ, जिसमें ईरान का तेल शामिल नहीं था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। उनके बयानों से संकेत मिलता है कि तत्काल सैन्य कार्रवाई से बचने की बात के बावजूद अमेरिका ईरान पर दबाव बनाए रखने की रणनीति अपना रहा है।
सऊदी अरब के हवाई अड्डे पर हमले के बाद हूतियों पर कार्रवाई के संकेत
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ मिलकर हूती विद्रोहियों के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई पर विचार करने के संकेत भी दिए हैं। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उन्हें रियाद हवाई अड्डे पर हुए हालिया हमले की जानकारी मिली है। अमेरिका इस घटना की समीक्षा करेगा और उसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय लेगा।
ट्रंप ने कहा कि उन्हें हमले के बारे में हाल ही में जानकारी मिली है और प्रशासन इस मामले में संभावित कदमों पर विचार करेगा। उनके बयान से सऊदी अरब में हुए हमलों के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिकी सक्रियता बढ़ने के संकेत मिले हैं।
रियाद हवाई अड्डे पर हमले में 12 की मौत, 309 घायल होने का दावा
सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के अनुसार, 10 अक्टूबर को किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाकर किए गए हमले में 12 लोगों की मौत हुई और 309 लोग घायल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, मृतकों में चार सऊदी नागरिक, दो बांग्लादेशी नागरिक और अमेरिका, मिस्र, जॉर्डन, सीरिया, फिलिस्तीन तथा सूडान के एक-एक नागरिक शामिल थे।
घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई गई है। उनका विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है। अधिकारियों ने हमले में संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन भी शुरू कर दिया है। घटना के बाद कई देशों ने सऊदी अरब को निशाना बनाए जाने की निंदा करते हुए उसके साथ एकजुटता जताई।
इससे पहले छह और सात अक्टूबर को किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा अभा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाए जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं। संबंधित अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में तीन लोगों की मौत हुई थी और 36 लोग घायल हुए थे।
कूटनीति और सुरक्षा के बीच संतुलन की चुनौती
ईरान के साथ बातचीत, होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही और सऊदी अरब में हवाई अड्डों पर हमलों ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ट्रंप ने जहां अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर तत्काल हमले से इनकार किया है, वहीं जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने की बात भी कही है।
ऐसे में अमेरिका के सामने ईरान के साथ बातचीत जारी रखने, क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संभावित सैन्य टकराव को नियंत्रित करने की चुनौती है। चुनाव से पहले ईरान की रणनीति और अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम पश्चिम एशिया की स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं।

