नई दिल्ली: दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही बाजारों में खरीदारी की तैयारियां शुरू हो गई हैं। लेकिन इस बार त्योहार से पहले ही महंगाई लोगों की चिंता बढ़ा रही है। चावल, चीनी, दाल और खाने के तेल जैसी रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की कीमतों में तेजी की खबरें सामने आ रही हैं। इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ सकता है। खासकर उन परिवारों की परेशानी बढ़ सकती है, जिनकी आमदनी सीमित है।
खाने-पीने की चीजों के महंगे होने के पीछे केवल एक वजह नहीं है। कई देशों में खराब मौसम के कारण फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं अंतरराष्ट्रीय तनाव और माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से भी बाजार में सामान पहुंचाने की लागत बढ़ रही है।
चावल और चीनी की कीमतों पर दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, चावल के उत्पादन में गिरावट की आशंका है। वैश्विक उत्पादन में करीब 2.4 प्रतिशत की कमी का अनुमान बताया गया है। भारत में भी उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।
चीनी के बाजार में भी कुछ ऐसी ही स्थिति देखने को मिल रही है। ब्राजील, भारत और थाईलैंड जैसे प्रमुख उत्पादक देशों में मौसम की मार से उत्पादन प्रभावित होने की चिंता है। रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर में कच्ची चीनी के वायदा भाव में करीब 8 प्रतिशत की तेजी का दावा किया गया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भारत के खुदरा बाजार में कितना पड़ेगा, यह घरेलू उत्पादन और उपलब्ध स्टॉक पर भी निर्भर करेगा।
दाल और खाने के तेल से बढ़ सकती है परेशानी
दाल भारतीय घरों में रोज बनने वाले खाने का अहम हिस्सा है। ऐसे में इसकी कीमत बढ़ने से आम परिवारों पर सीधा असर पड़ता है। सामने आई रिपोर्ट में पिछले एक साल के दौरान चना 23 प्रतिशत, उड़द 24 प्रतिशत और मटर 47 प्रतिशत तक महंगे होने का दावा किया गया है।
खाने के तेल की कीमतों पर भी दबाव बना हुआ है। इसकी एक वजह बायोफ्यूल बनाने में वनस्पति तेल का बढ़ता इस्तेमाल बताया जा रहा है। जब तेल का उपयोग ईंधन बनाने में ज्यादा होता है, तो खाने के लिए उपलब्ध सप्लाई और कीमतों पर असर पड़ सकता है।
महंगी ढुलाई से भी बढ़ रही लागत
खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने के पीछे माल ढुलाई भी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार प्रभावित होने की आशंका है।
जहाजों का रास्ता बदलने, ईंधन और बीमा का खर्च बढ़ने से सामान एक देश से दूसरे देश पहुंचाना महंगा हो सकता है। इसका असर आखिर में बाजार की कीमतों पर पड़ता है।
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त्योहार पर बढ़ेगा परिवारों का खर्च?
दिवाली पर मिठाई, नमकीन और दूसरे पकवान बनाने के लिए चीनी, तेल, चावल और दाल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में इन चीजों के दाम बढ़ने से त्योहार का खर्च और ज्यादा हो सकता है।
हालांकि, देश के अलग-अलग शहरों में कीमतें एक जैसी नहीं होती हैं। स्थानीय मंडियों में आवक, मांग और सरकारी स्टॉक के आधार पर दाम कम या ज्यादा हो सकते हैं।

