भोपाल: मध्यप्रदेश में 32 बैगा बच्चों की मौत के मामले के बीच बालाघाट की कमान आईएएस अधिकारी आदित्य सिंह को सौंपी गई है। प्रदेश में 23 आईएएस अधिकारियों के तबादलों के तहत उन्हें जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। आदित्य सिंह इससे पहले अशोकनगर के कलेक्टर रह चुके हैं, जहां जमीन नामांतरण से जुड़े एक मामले में शिकायत सामने आने के बाद उनका नाम चर्चा में आया था। इससे पहले भोपाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रहते हुए भी वह जमीनों की नीलामी से जुड़े विवाद को लेकर सुर्खियों में रहे थे।
बालाघाट में बच्चों की मौत के मामले के बाद प्रशासनिक बदलाव के तहत तत्कालीन कलेक्टर कुमार सत्यम को हटाकर हरदा भेजा गया है। अब आदित्य सिंह के सामने जिले में प्रशासनिक व्यवस्था संभालने और बैगा बच्चों की मौत के मामले से जुड़े सवालों के बीच जिम्मेदारी निभाने की चुनौती होगी।
सम्मान की घोषणा के दिन चर्चा में आया था तबादला
आदित्य सिंह जनवरी 2026 में उस समय चर्चा में आए थे, जब निर्वाचन कार्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए उनके सम्मान की घोषणा हुई थी। इसी दौरान उनके तबादले के आदेश भी सामने आए थे। उस समय वह अशोकनगर के कलेक्टर थे।
उनके अशोकनगर में पदस्थ रहने के दौरान आनंदपुर ट्रस्ट से जुड़े जमीन नामांतरण के मामले में शिकायत सामने आई थी। शिकायत में जमीन के नामांतरण के बदले करोड़ों रुपये मांगने का आरोप लगाया गया था। इस मामले के बाद उनके तबादले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि, आदित्य सिंह ने इन आरोपों का खंडन किया था। बाद में उन्हें अशोकनगर कलेक्टर के पद से हटाकर भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में उप सचिव बनाया गया था।
भोपाल स्मार्ट सिटी में जमीनों की नीलामी पर उठे थे सवाल
आदित्य सिंह भोपाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी भी रह चुके हैं। वर्ष 2020-21 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में स्मार्ट सिटी की तीन जमीनों की नीलामी को लेकर शिकायत हुई थी। आरोप लगाए गए थे कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया।
शिकायत के अनुसार, दो-दो फर्मों के हिस्सा लेने के बावजूद उनकी निविदाएं पहली बार में ही स्वीकार कर ली गई थीं। इस पर सवाल उठाते हुए कहा गया था कि ऐसी स्थिति में दोबारा टेंडर बुलाए जाने चाहिए थे। इसके अलावा, तीनों भूखंडों के आधार मूल्य तय करने में भी गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे।
प्लॉट नंबर 83 का आधार मूल्य 73.96 करोड़ रुपये, प्लॉट नंबर 79 का 63.80 करोड़ रुपये और प्लॉट नंबर 80 का 70.75 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया था। इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में शिकायत की गई थी। इसके बाद आदित्य सिंह का भोपाल स्मार्ट सिटी के सीईओ पद से तबादला कर दिया गया था।
ये भी पढ़ें: देवास में पुलिसकर्मी के ठिकानों पर लोकायुक्त का छापा, आय से 223% अधिक संपत्ति का खुलासा
कौन हैं आईएएस आदित्य सिंह?
आदित्य सिंह मध्यप्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 8 मार्च 1990 को हुआ था और वह रीवा के रहने वाले हैं। उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई रीवा में की, जबकि 11वीं और 12वीं की पढ़ाई राजस्थान के कोटा से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से पेपर टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
प्रशासनिक सेवा में आने के बाद आदित्य सिंह गुना में अपर कलेक्टर और मध्यप्रदेश शासन के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में उप सचिव के पद पर काम कर चुके हैं। वह हरदा और अशोकनगर के कलेक्टर भी रह चुके हैं।

