भोपाल: भोपाल बायपास से गुजरने वाले वाहन चालकों को अब बढ़ी हुई टोल दरों के मुताबिक शुल्क चुकाना होगा। राज्य सरकार ने बायपास पर 31 दिसंबर 2031 तक टोल वसूली की मंजूरी दी है। नई दरें पुराने ठेके की तुलना में करीब 6 से 7 प्रतिशत अधिक बताई जा रही हैं। इसके अलावा, हर साल थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आधार पर टोल शुल्क में बदलाव किया जाएगा। इससे बायपास का नियमित इस्तेमाल करने वाले वाहन चालकों और व्यावसायिक वाहनों की परिवहन लागत पर असर पड़ेगा।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सूत्रों के अनुसार, भोपाल बायपास पर पिछला टोल ठेका जुलाई 2026 में समाप्त हो गया था। इसके बाद सरकार ने नई अवधि के लिए टोल वसूली की अनुमति दी है। अधिसूचना के मुताबिक, 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक टोल वसूला जा सकेगा। पीडब्ल्यूडी को इस अवधि को पांच साल और बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है।
2007 की मूल दरों के आधार पर तय होगा टोल
भोपाल बायपास पर टोल शुल्क की गणना एक सितंबर 2007 से लागू मूल दरों के आधार पर की जाती है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) इन्हीं दरों को आधार बनाकर अलग-अलग टोल प्लाजा पर वाहन की श्रेणी के अनुसार शुल्क निर्धारित करता है।
मूल दरों में हर साल थोक मूल्य सूचकांक में होने वाले बदलाव के आधार पर संशोधन किया जाता है। इसके बाद निर्धारित शुल्क को निकटतम पांच रुपये तक पूर्णांकित किया जाता है। यानी महंगाई के सूचकांक में बदलाव के अनुसार वाहन चालकों को हर साल कम या ज्यादा टोल चुकाना पड़ सकता है।
कार से मल्टी-एक्सल ट्रक तक अलग-अलग दरें
निर्धारित मूल दरों के अनुसार, कार के लिए 0.35 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति यात्रा टोल दर तय है। हल्के व्यावसायिक वाहनों के लिए यह दर 0.85 रुपये, बसों के लिए 1.75 रुपये, ट्रकों के लिए 2.11 रुपये और मल्टी-एक्सल ट्रकों के लिए 4.21 रुपये प्रति किलोमीटर प्रति यात्रा है।
ये मूल दरें हैं। इन पर लागू वार्षिक संशोधन और संबंधित टोल प्लाजा के हिसाब से वास्तविक शुल्क निर्धारित किया जाता है। इसलिए अलग-अलग श्रेणी के वाहनों को चुकाई जाने वाली राशि में अंतर रहेगा।
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नियमित यात्रियों और परिवहन कारोबार पर असर
टोल की बढ़ी हुई दरों का सीधा असर उन वाहन चालकों पर पड़ेगा, जो रोजाना या नियमित रूप से भोपाल बायपास से गुजरते हैं। व्यावसायिक वाहनों के लिए टोल शुल्क परिवहन खर्च का हिस्सा होगा, जिसका असर माल ढुलाई की लागत पर भी पड़ सकता है।
31 दिसंबर 2031 तक टोल वसूली की मंजूरी मिलने के साथ ही अगले वर्षों में शुल्क में संशोधन का रास्ता भी खुला रहेगा। हालांकि, किसी वाहन चालक को वास्तविक रूप से कितना टोल देना होगा, यह वाहन की श्रेणी और संबंधित टोल प्लाजा पर लागू दर पर निर्भर करेगा।

