भोपाल: राजधानी भोपाल के बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में प्रस्तावित सीमेंट प्लांट को लेकर विरोध सामने आया है। मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने फंदाकलां में प्रस्तावित इस परियोजना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए राज्य सरकार से इसे तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े तालाब के आसपास इस तरह का उद्योग स्थापित करना पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी साजिश बताते हुए कहा कि सरकार को इस प्रस्ताव पर आगे विचार नहीं करना चाहिए।
700 करोड़ की परियोजना पर उठाए सवाल?
अजय सिंह ने बताया कि अल्ट्राटेक सीमेंट लिमिटेड द्वारा भोपाल के फंदाकलां क्षेत्र में लगभग 22 हेक्टेयर जमीन पर सीमेंट प्लांट लगाने की तैयारी की जा रही है। इस परियोजना पर करीब 700 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। प्रस्तावित प्लांट की सालाना उत्पादन क्षमता लगभग 80 लाख टन बताई गई है।
उन्होंने दावा किया कि जिस जमीन पर प्लांट लगाने की योजना है, वह बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में आती है। इसके बावजूद कंपनी ने अपनी परियोजना रिपोर्ट में तालाब के कैचमेंट एरिया और वर्ष 2022 में जारी संरक्षण आदेशों का पूरा विवरण नहीं दिया है।
अजय सिंह ने इसे गंभीर मामला बताते हुए आरोप लगाया कि प्रस्ताव में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया गया है। उन्होंने सरकार से परियोजना की कानूनी पात्रता की जांच कराने की मांग की।
रोजाना पांच लाख लीटर पानी की जरूरत पर चिंता
पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा 16 मार्च 2022 को जारी भोज वेटलैंड संरक्षण आदेश और सरकारी कैचमेंट मानचित्र के प्रारंभिक मिलान में प्रस्तावित स्थल बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र में दिखाई देता है।
उनके अनुसार, यदि इस क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिबंध लागू है, तो परियोजना को अनुमति देने पर विचार करना भी सवाल खड़े करता है।
अजय सिंह ने विशेषज्ञों की चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि प्लांट शुरू होने के बाद प्रतिदिन लगभग पांच लाख लीटर पानी की आवश्यकता होगी। इससे आसपास के भूजल स्तर पर असर पड़ने की आशंका है।
उन्होंने कहा कि सीमेंट प्लांट से निकलने वाली धूल और संभावित जल प्रदूषण बड़े तालाब के पर्यावरण को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा तालाब के आसपास आने वाले प्रवासी पक्षियों और अन्य जीवों के प्राकृतिक आवास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
जनसुनवाई से पहले प्रस्ताव खारिज करने की मांग
अजय सिंह ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के उस बयान पर भी सवाल उठाए, जिसमें परियोजना को अनुमति देने से पहले जनसुनवाई आयोजित करने की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रस्तावित स्थल प्रतिबंधित क्षेत्र में आता है, तो जनसुनवाई कराने के बजाय परियोजना को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर देना चाहिए।
उनका कहना है कि यह मामला केवल प्रदूषण नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ा है कि संबंधित क्षेत्र में उद्योग लगाने की कानूनी अनुमति दी जा सकती है या नहीं।
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बड़े तालाब को बताया भोपाल की जीवनरेखा
अजय सिंह ने कहा कि भोपाल का बड़ा तालाब शहर की पहचान होने के साथ लाखों लोगों के लिए पानी का महत्वपूर्ण स्रोत भी है। इसका संरक्षण सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक लाभ के लिए तालाब के पर्यावरण को खतरे में डालना उचित नहीं है। उन्होंने राज्य सरकार से प्रस्तावित परियोजना को तत्काल निरस्त करने और बड़े तालाब के जलग्रहण क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

