भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा में अब विधायकों के सवाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल के नोटिस सहित संसदीय कामकाज को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की तैयारी है। इसके लिए विधायकों, उनके निजी सहायकों (पीए) और सरकारी विभागों के अधिकारियों को 28 से 30 अक्टूबर तक तीन दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के जरिए विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन करने और कागजी कामकाज कम करने पर जोर रहेगा।
विधानसभा परिसर में आयोजित होने वाले प्रशिक्षण में मंत्रियों को छोड़कर अन्य विधायकों को शामिल किया जाएगा। विधायकों के 50-50 के बैच बनाए गए हैं। उनके साथ विधानसभा संबंधी कामकाज संभालने वाले निजी सहायकों और कर्मचारियों को भी डिजिटल प्रणाली के इस्तेमाल की जानकारी दी जाएगी।
सवाल लगाने से जवाब मिलने तक डिजिटल प्रक्रिया
प्रशिक्षण में विधायकों को ऑनलाइन सवाल लगाने, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल के नोटिस भेजने, सदन की कार्यसूची देखने और विधानसभा की कार्यवाही से जुड़े दस्तावेज हासिल करने की प्रक्रिया समझाई जाएगी। इसका उद्देश्य विधायकों और विधानसभा सचिवालय के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
सरकारी विभागों की विधानसभा शाखाओं के नोडल अधिकारियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। वे डिजिटल माध्यम से विधायकों के सवाल और नोटिस प्राप्त कर सकेंगे। संबंधित विभागों से जानकारी जुटाने, जवाब तैयार करने और विधानसभा सचिवालय तक भेजने की प्रक्रिया भी ऑनलाइन संचालित की जा सकेगी।
दिसंबर के सत्र से पहले तैयारी
विधानसभा का शीतकालीन सत्र दिसंबर के तीसरे सप्ताह में संभावित है। 14 से 26 दिसंबर के बीच सत्र आयोजित होने की संभावना के मद्देनजर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में होने वाला प्रशिक्षण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सत्र के दौरान विधायकों की ओर से पूछे जाने वाले सवालों और विभिन्न प्रस्तावों पर विभागों को समय पर जवाब देना होता है। नेवा का प्रभावी इस्तेमाल होने पर संबंधित दस्तावेजों तक पहुंच आसान होगी और विभागों के बीच समन्वय बेहतर हो सकेगा। हालांकि, कागजी प्रक्रिया कितनी कम होगी, यह व्यवस्था के वास्तविक क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
29.85 करोड़ रुपये की परियोजना
मध्य प्रदेश विधानसभा में नेवा परियोजना के क्रियान्वयन की लागत 29.85 करोड़ रुपये बताई गई है। इस परियोजना का उद्देश्य विधानसभा की कार्यवाही को डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराना और संसदीय प्रक्रियाओं में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना है।
आम नागरिक भी देख सकेंगे सदन के दस्तावेज
नेवा के सार्वजनिक पोर्टल के माध्यम से आम नागरिक भी विधानसभा से संबंधित उपलब्ध जानकारियां हासिल कर सकेंगे। इसमें सदन में रखे गए दस्तावेज, प्रश्न, विधेयक, सदस्यों की जानकारी और समिति की रिपोर्ट जैसे रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।
इससे नागरिकों को विधानसभा में उठाए गए मुद्दों और सरकार के जवाबों की जानकारी प्राप्त करने में आसानी होगी। हालांकि, सुरक्षित लॉगिन के तहत उपलब्ध सभी आंतरिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं होंगे।
पेपरलेस विधानसभा की दिशा में कदम
नेवा के जरिए सवाल, नोटिस, विधेयक और अन्य संसदीय दस्तावेज डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे कागज के इस्तेमाल और दस्तावेजों के भौतिक आदान-प्रदान को कम करने में मदद मिल सकती है। विधानसभा को पूरी तरह पेपरलेस बनाने का लक्ष्य तभी हासिल होगा, जब संबंधित प्रक्रियाएं व्यापक रूप से डिजिटल व्यवस्था में स्थानांतरित हो जाएंगी।

