सिरोंज: सिरोंज के संजीवनी अस्पताल में इलाज के दौरान एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतका की पहचान नगर के वार्ड नंबर 12 निवासी रीति बाई के रूप में हुई है। परिजनों का कहना है कि महिला का करीब दस दिनों तक अस्पताल में इलाज चला और इस दौरान एक लाख रुपए से ज्यादा खर्च हो गए। इसके बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। महिला की मौत के बाद नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा किया और इलाज को लेकर कई सवाल उठाए।
दस दिन चला इलाज, फिर भी नहीं बच सकी जान
परिजनों के अनुसार, रीति बाई को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर संजीवनी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां करीब दस दिनों तक उनका इलाज चलता रहा। परिवार का दावा है कि इलाज और दवाइयों पर एक लाख रुपए से अधिक खर्च किए गए, लेकिन महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बावजूद मरीज की जान नहीं बचाई जा सकी। हालांकि, महिला की मौत का वास्तविक कारण क्या था और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी।
मौत के बाद अस्पताल में हंगामा
रीति बाई की मौत की जानकारी मिलते ही परिजनों में नाराजगी फैल गई। उन्होंने अस्पताल में इलाज की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। इस दौरान अस्पताल परिसर में हंगामे की स्थिति बन गई। बाद में महिला के शव को एंबुलेंस से ले जाने की जानकारी सामने आई है।
मामले को लेकर अस्पताल के डॉक्टर ने भी मीडिया से बातचीत की है, लेकिन उनका विस्तृत बयान उपलब्ध नहीं हो सका है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन का पूरा पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
पोस्टमार्टम नहीं होने को लेकर भी सवाल
इस घटना में महिला की मौत के बाद अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अब तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि परिजनों ने पुलिस में कोई शिकायत दर्ज कराई है या नहीं। साथ ही महिला का पोस्टमार्टम कराया गया था या नहीं, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब परिजन इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं, तो मौत के कारणों की जांच किस तरह होगी। हालांकि, पुलिस शिकायत और पोस्टमार्टम की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही इस संबंध में कोई निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
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निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई
महिला की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर अस्पताल की उपचार व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। परिजनों के आरोपों की सच्चाई जानने के लिए मरीज के इलाज से जुड़े दस्तावेज, डॉक्टरों की रिपोर्ट और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की ओर से मामले की जांच होने पर यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला को किस हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था, इलाज के दौरान क्या उपचार दिया गया और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।
फिलहाल परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन का विस्तृत पक्ष भी सामने आना बाकी है। ऐसे में किसी को जिम्मेदार ठहराने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि महिला की मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके और परिजनों को उनके सवालों का जवाब मिल सके।

