ग्वालियर: जिले में डीजल और समय बचाने का लालच लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। यहां 15 से 20 किलोमीटर का चक्कर बचाने के लिए भारी वाहन चालक खतरनाक शॉर्टकट अपना रहे हैं। हाल ही में शीतला माता मंदिर के पास स्थित 90 डिग्री की ढलान पर धान से भरा एक ओवरलोड ट्रक बेकाबू हो गया। इस दर्दनाक हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 41 लोग घायल हुए थे।
पड़ताल में सामने आया है कि भारी वाहन चालक दूरी कम करने के साथ पुलिस चेकिंग से बचने के लिए भी इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कुछ किलोमीटर बचाने की यह कोशिश जानलेवा साबित हो रही है।
कम दूरी की वजह से कर रहे इस रास्ते का इस्तेमाल
चीनौर से नयागांव होकर हाईवे तक जाने वाले मुख्य बनवार मार्ग की दूरी करीब 32 से 35 किलोमीटर है। वहीं शीतला माता मंदिर वाले रास्ते से यह दूरी घटकर 15 से 16 किलोमीटर रह जाती है। इससे करीब 15 से 20 किलोमीटर की बचत होती है।
इसी वजह से भितरवार, करहिया, चीनौर और बनवार की ओर से आने वाले भारी वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं। हालांकि, मंदिर के पास तीखी ढलान और खतरनाक मोड़ होने से यहां दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
न CCTV कैमरे, न स्ट्रीट लाइट
मंदिर के पास रास्ते पर ढलान और खतरनाक मोड़ हैं। पूरे मार्ग पर CCTV कैमरे और स्ट्रीट लाइट नहीं होने की बात भी सामने आई है। रात के समय भारी वाहनों की आवाजाही से खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, ढलान पर वाहन अनियंत्रित होने से यहां हादसों की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद भारी वाहनों की आवाजाही जारी है।
दोपहिया चालकों से भी वसूली के आरोप
स्थानीय लोगों ने मंदिर मार्ग पर दुकान लगाने, बिजली कनेक्शन लेने और दोपहिया वाहन चालकों से भी पैसे वसूलने के आरोप लगाए हैं। यहां हर सोमवार मेला लगता है। नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने से वाहनों और दुकानों की आवाजाही भी बढ़ जाती है।
टैक्स बचाने के लिए भी कर रहे मार्ग का इस्तेमाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि शीतला-चीनौर मार्ग का इस्तेमाल रेत कारोबार और मंडी टैक्स से बचने के लिए भी किया जाता है। उनके मुताबिक, इस रास्ते से वाहन मुख्य चेकिंग पॉइंट के दायरे से बाहर निकल जाते हैं और ग्वालियर पहुंचने की दूरी भी कम हो जाती है। कम दूरी, चेकिंग से बचने की संभावना और भारी वाहनों की आवाजाही के बीच इस मार्ग पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

