भोपाल: मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की करीब 60 लाख संपत्तियों की रजिस्ट्री मुफ्त कराई जाएगी। इन संपत्तियों का कुल मूल्य करीब 87 हजार करोड़ रुपये आंका गया है। खास बात यह है कि लाभार्थियों को रजिस्ट्री के लिए स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं देना होगा। करीब 9 हजार करोड़ रुपये का यह खर्च राज्य सरकार खुद उठाएगी। इसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष के बजट में अतिरिक्त राशि का प्रावधान किया जाएगा।
ड्रोन सर्वे में 49.52 लाख संपत्तियां चिह्नित
राजस्व विभाग आबादी भूमि पर बने मकान, दुकान, खलिहान और खाली भूखंडों का मालिकाना हक संबंधित उपभोगकर्ताओं को दे रहा है। इसके लिए ड्रोन तकनीक से सर्वे कराया गया है। अब तक प्रदेश में 49 लाख 52 हजार 567 संपत्तियों की पहचान हो चुकी है। वहीं, 600 गांवों में सर्वे का काम जारी है। इन गांवों का सर्वे पूरा होने के बाद संपत्तियों की संख्या 55 से 60 लाख तक पहुंचने का अनुमान है।
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सरकार बजट से देगी पंजीयन शुल्क
योजना के तहत ग्रामीणों को रजिस्ट्री का कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। हालांकि, सरकार प्रत्येक लाभार्थी को एसएमएस के जरिए यह जानकारी दे रही है कि उसकी संपत्ति की रजिस्ट्री पर कितनी स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क बनता है। इससे लाभार्थियों को मुफ्त रजिस्ट्री से होने वाली बचत का भी पता चल सकेगा।
वर्तमान में इस योजना के लिए राजस्व विभाग के बजट में 3,800 करोड़ रुपये का प्रावधान है, जबकि संपत्तियों के कुल मूल्य के हिसाब से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क करीब 9 हजार करोड़ रुपये बन रहा है। ऐसे में शेष राशि की व्यवस्था आगामी बजट में की जाएगी। सरकार यह राशि पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को उपलब्ध कराएगी, ताकि ग्रामीणों पर रजिस्ट्री का कोई आर्थिक बोझ न पड़े।

