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सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

भोपाल: मध्यप्रदेश में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल और उनकी मांगों को लेकर सियासत तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने गुरुवार को भोपाल में प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान का श्रेय लेने वाली सरकार शहरों को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारियों को सम्मानजनक वेतन, स्थायी रोजगार और सुरक्षा देने में विफल रही है। इस मामले को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मांगों के जल्द निराकरण की मांग भी की है।

3 नवंबर को प्रदर्शन, 4 नवंबर से प्रदेशव्यापी हड़ताल

सिंघार ने कहा कि प्रदेश को स्वच्छ रखने वाले कर्मचारी आज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं। 3 नवंबर को भोपाल में प्रदर्शन के बाद 4 नवंबर से प्रदेशव्यापी कामबंद हड़ताल की घोषणा की गई। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा सरकार स्वच्छता रैंकिंग और पुरस्कारों का श्रेय तो लेती है, लेकिन सफाई कर्मचारियों के भविष्य की गारंटी क्यों नहीं देती। स्वच्छता का श्रेय सरकार को और शोषण, कम वेतन तथा असुरक्षित रोजगार कर्मचारियों को क्यों मिल रहा है।

चार प्रमुख मांगों पर सरकार से जवाब मांगा

नेता प्रतिपक्ष ने चार प्रमुख मांगें रखीं। वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी एवं विनियमित कर्मचारियों को नियमित कर सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सफाई कर्मचारियों के लिए न्यूनतम 25,000 रुपए मासिक वेतन सुनिश्चित हो। ठेकेदारी और आउटसोर्सिंग व्यवस्था खत्म कर स्थायी एवं सुरक्षित रोजगार दिया जाए। सेवाकाल में मृत्यु होने पर मृत कर्मचारी के परिवार के एक पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति मिले।

29 दिन की मेहनत, सिर्फ 9 हजार वेतन

सिंघार ने कहा कि भोपाल में सफाई कर्मचारियों को 29 दिन काम करने के बाद लगभग 9,000 रुपए वेतन मिलता है। अन्य नगरीय निकायों में कहीं 7,000 तो कहीं मात्र 6,000 रुपए दिए जा रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूछा कि इतनी महंगाई में कर्मचारी घर का किराया, राशन, बच्चों की फीस और परिवार का इलाज कैसे कराए।

प्रयागराज में पैर धोकर सम्मान, एमपी में संघर्ष

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वाल्मीकि समाज की आबादी 7 लाख से अधिक है और लगभग 4 लाख लोग सफाई कार्य से जुड़े हैं। वर्ष 2019 के प्रयागराज कुंभ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर सम्मान का संदेश दिया था। लेकिन आज वही समाज अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहा है। क्या यही भाजपा का सामाजिक न्याय है, यह सवाल भी उन्होंने उठाया।

सीवर सफाई में 8 मौतों का मुद्दा उठाया

सिंघार ने कहा कि जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में सीवर सफाई के दौरान 8 लोगों की मौत हुई और 4 घायल हुए। उज्जैन में एक की मौत और दो लोग गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के गृह जिले में भी सफाई कर्मचारी सुरक्षित नहीं हैं। सरकार बताए कि सीवर सफाई के दौरान कर्मचारियों की जान बचाने के लिए क्या ठोस व्यवस्था की गई है।

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कानून और हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला

उन्होंने मैनुअल स्कैवेंजिंग अधिनियम 2013 की धारा 7 और 9 का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा उपायों के बिना सीवर सफाई पर रोक है और उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सीवर सफाई के दौरान मृत्यु पर 30 लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान है। सरकार बताए कि कितने परिवारों को मुआवजा मिला और कितने प्रकरण लंबित हैं।

सिंघार ने यह भी कहा कि 25 मार्च 2025 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए व्यापक नीति बनाने का निर्देश दिया था। 21 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट की युगलपीठ ने सरकार की अपील खारिज कर नीति दोबारा तैयार करने का निर्देश बरकरार रखा। उन्होंने सवाल किया कि कर्मचारियों को सुरक्षा देने के बजाय सरकार अदालत में उनके अधिकारों का विरोध क्यों कर रही है।

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