नई दिल्ली। बढ़ती ठंड के साथ ही राजधानी दिल्ली सहित देश के अन्य महानगरों में वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। धुंध जैसे हालात बन चुके हैं, जिनसे लोगों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और गले में जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
10 हजार से अधिक मरीज हर साल अस्पताल पहुंचते हैं
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार केवल दिल्ली में ही पिछले तीन वर्षों में दो लाख से अधिक तीव्र श्वसन रोगों के मामले सामने आए, जिनमें हर साल औसतन 10 हजार से अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
अन्य महानगरों में भी हालात गंभीर
मुंबई और चेन्नई में भी प्रदूषण के चरम दिनों में अस्पतालों में मरीजों की संख्या अचानक कई गुना बढ़ गई। विशेषज्ञों ने इसे प्रदूषित हवा का सीधा असर बताया है।
कई कारक मिलकर बढ़ाते हैं खतरा
स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में बताया कि प्रदूषण प्रमुख ट्रिगर है, लेकिन अकेला कारण नहीं। खान-पान, काम की प्रकृति, आर्थिक स्थिति और पुरानी बीमारियाँ भी जोखिम बढ़ाती हैं।
राष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था मजबूत
सरकार ने अब आरआई मामलों की डिजिटल मॉनिटरिंग शुरू किए जाने की जानकारी दी। 30 राज्यों में 230 सेंटिनल साइट्स स्थापित की गई हैं जहां से रोजाना डेटा एकत्र किया जा रहा है।
आईसीएमआर अध्ययन के चौंकाने वाले परिणाम
33,213 मरीजों पर किए गए अध्ययन में साफ संकेत मिले कि जैसे-जैसे वायु गुणवत्ता गिरती है, वैसे-वैसे इमरजेंसी में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ जाती है।
प्रदूषण ने बिगाड़ी राजधानी दिल्ली की हवा, सांस लेने में भी हो रही परेशानी, अस्पतालों में बढ़े मरीज
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