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KGMU धर्मांतरण मामला: डॉ. रमीज़ की 48 घंटे की पुलिस रिमांड खत्म, कई चौंकाने वाले खुलासे

लखनऊ। KGMU धर्मांतरण मामले में आरोपी डॉ. रमीज़ुद्दीन नायक की 48 घंटे की पुलिस रिमांड बुधवार को समाप्त हो गई। इस दौरान पुलिस ने आरोपी से 120 से अधिक सवाल पूछे। पूछताछ के बाद मामले में कई अहम और सनसनीखेज जानकारियाँ सामने आई हैं।

गोपनीय स्थान पर हुई पूछताछ

सुरक्षा कारणों के चलते आरोपी से पूछताछ गोपनीय स्थान पर की गई। सूत्रों के अनुसार, STF ने भी डॉ. रमीज़ से अलग से पूछताछ की। हालांकि धर्मांतरण के दबाव से जुड़े कई सवालों पर आरोपी ने चुप्पी साधे रखी।

जन्नतनाम का फोल्डर, 13 साल का डिजिटल डाटा मिला

पूछताछ के दौरान आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने उसके घर से एक मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद किए। इन लैपटॉप्स में 13 वर्षों का डिजिटल डाटा सुरक्षित पाया गया है। पुलिस के अनुसार, इसमें आरोपी की निजी गतिविधियों के साथ-साथ मेडिकोज ग्रुप से जुड़े संदिग्ध संपर्क, चैट्स और कई आपत्तिजनक वीडियो शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया है कि आरोपी ने लैपटॉप में “जन्नत” नाम का एक अलग फोल्डर बना रखा था, जिसमें कथित तौर पर हिंदू लड़कियों के नंबर, तस्वीरें, वीडियो और व्यक्तिगत जानकारियाँ सेव थीं। वह हर संपर्क में आई लड़की की डिटेल डिजिटल रूप से सुरक्षित रखता था।

50 से अधिक युवतियों के वीडियो, कालगर्ल्स का भी मिला डाटा

पुलिस को आरोपी के दूसरे लैपटॉप से 50 से अधिक युवतियों के वीडियो मिले हैं। इनमें उसकी पहली पत्नी सहित अन्य महिलाओं के वीडियो भी शामिल बताए जा रहे हैं। वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि इन वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने के लिए किया जाता था। लैपटॉप के एक अन्य फोल्डर में कथित तौर पर कालगर्ल्स की सूची भी मिली है, जिसमें उनके नाम, संपर्क नंबर और अन्य विवरण शामिल हैं। सूत्रों का दावा है कि इनका इस्तेमाल धर्मांतरण के नेटवर्क में मुस्लिम युवाओं को फंसाने के लिए किया जाता था। फिलहाल इन दावों की तकनीकी और फॉरेंसिक जांच की जा रही है।

डाटा रिकवरी में जुटी फॉरेंसिक टीम

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने कई मोबाइल नंबर, चैट्स और डिजिटल रिकॉर्ड डिलीट किए थे। अब फॉरेंसिक टीम डिलीट डाटा रिकवर करने में जुटी हुई है। वहीं पुलिस आरोपी के दिल्ली में छिपने, दोस्त की मदद से मोबाइल खरीदने, आगरा में डॉ. परवेज से कथित संबंध और नेपाल सीमा तक संपर्क इन सभी बिंदुओं पर जांच भी कर रही है। आरोपी ने बताया कि वह दिल्ली में दोस्तों के पास रुका था, लेकिन कई सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।

पीड़िता ने मिलने से किया इनकार

पुलिस ने यौन शोषण पीड़िता से आरोपी का सामना नहीं कराया। पीड़िता ने भी आरोपी से मिलने से स्पष्ट इनकार कर दिया। साथ ही पूछताछ में आरोपी ने अपने माता-पिता की संलिप्तता से इनकार किया है। उसका कहना है कि पीड़िता से उसका संपर्क था और मुलाकातें भी हुईं, लेकिन धर्मांतरण के प्रयास में उसके परिवार की कोई भूमिका नहीं थी। जांच में यह भी सामने आया है कि मेडिकोज ग्रुप के जरिए आरोपी का मेडिकल छात्रों और युवाओं पर प्रभाव था, जिसका इस्तेमाल वह अपने नेटवर्क को बढ़ाने में करता था। हालांकि इस संबंध में उसने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया, लेकिन तीन मददगारों के नाम जरूर बताए हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपी कई बार नशे की हालत में आपत्तिजनक गतिविधियों को अंजाम देता था। इस एंगल पर भी पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है।

 

 

 

 

 

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