बालाघाट। देश में आरक्षण की सीमा और उसकी पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक किशोर समरिते द्वारा देश के सभी वर्गों को 100 प्रतिशत आरक्षण देने की साहसिक मांग पर केंद्र सरकार ने औपचारिक संज्ञान ले लिया है। इस कदम ने न केवल मध्य प्रदेश, बल्कि देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
सीबीआई जांच की मांग पर मंत्रालय का जवाब
किशोर समरिते ने दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार को एक पत्र प्रेषित किया था, जिसमें उन्होंने देश की वर्तमान आरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए थे। उनकी मांग थी कि वर्तमान में प्रभावी आरक्षण के अतिरिक्त शेष 50 प्रतिशत आरक्षण किन वर्गों को और किस आधार पर दिया जा रहा है, इसकी सूक्ष्म जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराई जाए।
भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, शास्त्री भवन (नई दिल्ली) ने इस पत्र पर गंभीरता दिखाते हुए 19 फरवरी 2026 को आधिकारिक जवाब जारी किया है। मंत्रालय के अवर सचिव राजेश कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र (संख्याः ब्ब्-11014/5/2025-Corporate-Cell) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि समरिते द्वारा दिए गए सुझावों और मांगों को ’यथोचित विचार के लिए नोट कर लिया गया है।
क्या होगा इसका असर
जानकारों का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा इस विषय को आधिकारिक तौर पर दर्ज करना यह संकेत देता है कि भविष्य में आरक्षण की नीतियों में बदलाव या उनके ऑडिट को लेकर सरकार गंभीर हो सकती है। समरिते की इस मांग ने आरक्षित और अनारक्षित दोनों वर्गों के बीच एक नई वैचारिक हलचल पैदा कर दी है।


