मप्र की दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा होने के बाद रिक्त क्या हुई, प्रदेश की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई। विधायक राजेंद्र भारती को फर्जी एफडी मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद उनकी सदस्यता समाप्त होना। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों के तहत एक स्वाभाविक और संवैधानिक कदम है। विधानसभा द्वारा सीट रिक्त घोषित कर निर्वाचन आयोग को सूचना भेजना इसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है। अब नजरें उपचुनाव पर टिक गई हैं, जो कानूनन 6 महीने के भीतर, यानी 2 अक्टूबर 2026 तक कराना अनिवार्य है। हालांकि वर्तमान में पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनावों के चलते दतिया उपचुनाव की अधिसूचना में कुछ समय लगना तय माना जा रहा है। चुनाव आयोग आमतौर पर बड़े चुनावी कार्यक्रमों के दौरान उपचुनाव घोषित करने से बचता है, जिससे संसाधनों और प्रशासनिक संतुलन को बनाए रखा जा सके। इस घटनाक्रम ने सियासी हलचल को भी तेज कर दिया है। भाजपा ने जहां इसे न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए शीघ्र उपचुनाव की मांग उठाई है, वहीं कांग्रेस के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति बन गई है। दतिया सीट पर पकड़ बनाए रखना अब कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न होगा, जबकि भाजपा इसे सत्ता संतुलन मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रही है। महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि क्या यह उपचुनाव टल सकता है। विशेषज्ञों की राय स्पष्ट है कि केवल जमानत या सजा के निलंबन से सदस्यता बहाल नहीं होती। जब तक दोषसिद्धि पर उच्च न्यायालय से स्थगन नहीं मिलता, तब तक सदस्यता की बहाली संभव नहीं है। ऐसे में उपचुनाव टलने की संभावना भी उसी स्थिति में बनेगी।
दतिया का यह उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह मतदाताओं के सामने न्याय, नैतिकता और राजनीतिक विश्वसनीयता के मुद्दों की परीक्षा भी बनेगा। अब देखना होगा कि आने वाले महीनों में जनता किस दिशा में अपना विश्वास जताती है और कौन सी पार्टी इस मौके को बेहतर रणनीति में बदल पाती है।
-मिलिंद ठाकरे

