राजेंद्र भारती प्रकरण पर हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार, 14 जुलाई की सुनवाई के बाद ही साफ होगी तस्वीर
दतिया/भोपाल। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव को लेकर चल रही राजनीतिक अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। चुनाव आयोग द्वारा राज्यसभा और विभिन्न विधानसभा सीटों के लिए जारी अधिसूचना में दतिया सीट का उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि तत्काल उपचुनाव नहीं कराया जाएगा।
दतिया सीट अप्रैल 2026 में उस समय रिक्त हुई थी, जब कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। उन्हें एक पुराने धोखाधड़ी प्रकरण में तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके खिलाफ राजेंद्र भारती ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां मामला अभी विचाराधीन है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को निर्धारित की है। ऐसे में राजनीतिक और कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं होने के कारण चुनाव आयोग ने दतिया में उपचुनाव की घोषणा से दूरी बनाए रखी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि न्यायालय के अंतिम निर्णय से पहले चुनाव कराने की स्थिति में बाद में संवैधानिक और प्रशासनिक जटिलताएं पैदा हो सकती थीं।
कांग्रेस की निगाहें कोर्ट के फैसले पर
दतिया सीट को लेकर कांग्रेस शुरू से ही न्यायालय से राहत मिलने की उम्मीद जता रही है। 26 मई को प्रस्तावित सुनवाई के दौरान राजेंद्र भारती की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के समय पर न्यायालय नहीं पहुंच पाने के कारण मामले की सुनवाई नहीं हो सकी थी। इसके बाद अदालत ने अगली तारीख 14 जुलाई तय की।
अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ दतिया की जनता की नजरें भी हाईकोर्ट के आगामी फैसले पर टिकी हैं। अदालत के निर्णय के बाद ही यह तय हो सकेगा कि राजेंद्र भारती की सदस्यता बहाल होगी या फिर दतिया विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव का रास्ता साफ होगा।
भाजपा की तैयारियों पर ब्रेक?
दतिया में संभावित उपचुनाव को देखते हुए भाजपा संगठन ने क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी थीं। चुनाव आयोग की अधिसूचना में सीट का नाम शामिल न होने से पार्टी की चुनावी तैयारियों पर फिलहाल विराम लग सकता है, जबकि कांग्रेस इसे कानूनी लड़ाई में अपनी उम्मीदों के लिए सकारात्मक संकेत मान रही है।

