मुंबई। गोवा पोंडा विधानसभा सीट पर प्रस्तावित उपचुनाव को बड़ा झटका लगा है। मुंबई उच्च न्यायालय की गोवा पीठ ने चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना को रद्द करते हुए स्पष्ट कर दिया कि 9 अप्रैल को होने वाला मतदान अब नहीं होगा। इस फैसले के बाद राज्य की सियासत में नई बहस शुरू हो गई है।
कोर्ट का फैसला क्यों अहम?
दरअसल न्यायमूर्ति वाल्मिकी मेनेजेस और अमित जामदार की खंडपीठ ने दो स्थानीय मतदाताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम बचा है, ऐसे में उपचुनाव कराना आवश्यक नहीं है।
क्या कहता है कानून?
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार यदि किसी विधानसभा का शेष कार्यकाल एक वर्ष से कम हो,तो उपचुनाव कराना अनिवार्य नहीं होता। अदालत ने इसी प्रावधान को आधार बनाते हुए अधिसूचना को अमान्य ठहराया।
सीट खाली क्यों हुई थी?
पोंडा सीट पिछले साल अक्टूबर में खाली हुई थी, जब पूर्व मंत्री रवि नाइक का निधन हो गया था। इसके बाद भारत का चुनाव आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करते हुए 9 अप्रैल को मतदान और 4 मई को मतगणना की तारीख घोषित की थी।
चुनाव तैयारियों पर असर
जानकारी अनुसार, निर्वाचन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। प्रशासनिक स्तर पर मतदान केंद्रों की व्यवस्था, सुरक्षा तैनाती और कर्मचारियों की ड्यूटी तय की जा चुकी थी। लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद पूरी प्रक्रिया पर विराम लग गया है। इस फैसले से गोवा की राजनीति में हलचल बढ़ना तय है। राजनीतिक दलों को अब इस सीट पर चुनावी रणनीति बदलनी पड़ेगी। साथ ही, यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण भी बन सकता है।

