बालाघाट। नगर के शासकीय देवी तालाब की भूमि के राजस्व रिकॉर्ड की त्रुटियों को ठीक करने के लिए उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका क्रमांक WP/22409/2024 प्रस्तुत की गई एवं शासकीय देवी तालाब के हो रही पर्यावरणीय क्षति के सम्बन्ध में एनजीटी भोपाल में याचिका OA/130/2025 प्रस्तुत की गई है l दोनों याचिकाओं में मध्यप्रदेश शासन और कलेक्टर बालाघाट प्रतिवादी के रूप में आवश्यक पक्षकार है और दोनों ही याचिकाओं में मध्यप्रदेश शासन और कलेक्टर बालाघाट की ओर से जवाब प्रस्तुत होना था l कलेक्टर बालाघाट के द्वारा दोनों ही याचिकाओं में मध्यप्रदेश शासन का पक्ष रखने और जवाब प्रस्तुत करने के लिए एसडीएम बालाघाट गोपाल सोनी को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है किन्तु इनके द्वारा दोनों विभिन्न न्यायालयों की भिन्न याचिकाओं में शासन का जो पक्ष प्रस्तुत किया गया है उसमे प्रथमदृष्टया विरोधाभाष प्रतीत हो रहा है और मानो ऐसा लग रहा है कि अतिक्रमणकारियों के लाभ के लिए प्रस्तुत किया गया तभी तो अतिक्रमणकारी भी इस बात का ढिंढोरा पिट रहे है कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता l
मध्यप्रदेश शासन का विरोधाभाषी जवाब
मध्यप्रदेश शासन एवं कलेक्टर बालाघाट ओर से नियुक्त प्रभारी अधिकारी गोपाल सोनी के द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका क्रमांक WP/22409/2024 में दिनांक 09/01/2026 को शपथ पत्र के साथ स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करते हुए बताया है कि देवी तालाब की भूमि का खसरा नंबर 319 है और वह वर्ष 1985 से निजी स्वामित्व में दर्ज है जबकि एनजीटी भोपाल में याचिका OA/130/2025 में दिनांक 11/01/2026 को शपथ पत्र के साथ जवाब दाखिल करते हुए बताया है कि देवी तालाब की भूमि का खसरा नंबर 319 है वह निजी भूमि है l अब एक ही व्यक्ति के एक ही मामले में दो अलग-अलग न्यायालय में भिन्न-भिन्न जवाब देना विरोधाभाष तो उत्पन्न करता है क्योंकि उन्होंने उच्च न्यायालय में बताया है कि वर्ष 1985 से देवी तालाब की भूमि निजी स्वामित्व में दर्ज है इसका मतलब वह भूमि वर्ष 1985 के पूर्व शासकीय भूमि थी और शासकीय भूमि निजी कैसे हो गई ?
करोड़ो की शासकीय भूमि का ग़बन
बालाघाट तहसील के तत्कालीन तहसीलदार रामबाबू देवांगन के द्वारा दिनांक 26.02.2020 को शासकीय देवी तालाब की भूमि के मालिकाना हक के सम्बन्ध में एक विस्तृत जांच करने के उपरांत तत्कालीन एसडीएम के.सी.बोपचे के समर्थन से कलेक्टर बालाघाट को जांच प्रतिवेदन भेजते हुए मांग की गई थी कि बालाघाट नगर के देवी तालाब की भूमि जिसका खसरा क्रमांक 319 रकबा 16.14 एकड़ है और उक्त खसरा के राजस्व अभिलेखों में 123 बटांकन होकर निजी स्वामित्व में दर्ज है उन सभी 123 बटांकन में से 121 बटांकन में मध्यप्रदेश शासन का नाम दर्ज किया जावें लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि एक जिम्मेदार राजस्व अधिकारी के द्वारा भेजे गए जांच प्रतिवेदन पर बालाघाट का राजस्व विभाग आज तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाया और शासकीय सेवक होते हुए भी शासन की करोडो रूपए की शासकीय भूमि के बंदरबाट और गबन को जारी रखे हुए है l
तहसील बालाघाट की संदिग्ध भूमिका
राजस्व विभाग के सबसे अहम और महत्वपूर्ण कार्यालय तहसील कार्यालय होता है जहाँ तहसीलदार के द्वारा उसके अधीन राजस्व क्षेत्र के सभी राजस्व रिकॉर्ड को दुरस्त और त्रुटिरहित रखता है और कभी किसी रिकॉर्ड में त्रुटी दर्शित होती है तो तत्काल उसे दुरस्त करता है किन्तु बहुचर्चित शासकीय देवी तालाब की भूमि के बंदरबाट और गबन के मामले की जानकारी लगभग सभी को है और दिनांक 26.02.2020 को तत्कालीन तहसीलदार बालाघाट रामबाबू देवांगन के द्वारा जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत कर देवी तालाब की भूमि को मध्यप्रदेश शासन के नाम से दर्ज करने के लिए अनुसंशित करने के उपरांत देवी तालाब की भूमि के रिकॉर्ड को ठीक न करना और पहले की त्रुटी को जारी रखकर उसे उसका मालिकाना हक किसी निजी व्यक्ति के नाम पर जारी रखना भी अपराध की श्रेणी में आता है l
अतिक्रमणकारियों के बुलंद हौसले
कई वर्षों से शासकीय देवी तालाब में अतिक्रमण के तौर पर उसके जलीय क्षेत्र को धीरे-धीरे भरकर वहां भरे गए क्षेत्र में लगातार निर्माण का कार्य किया जा रहा है और तालाब को दूषित किया जा रहा है और जिला प्रशासन और राजस्व विभाग इस पर मौन बना हुआ है और लगातार अतिक्रमण और प्रदुषण को अपनी मूक सहमति दे रहा है इसी कारण अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद है और इनके हौसले तो इतने बुलंद है कि जब एनजीटी भोपाल और एसडीएम बालाघाट के आदेश के पर देवी तालाब से अतिक्रमण के रूप में मलमा निकालने का कार्य किया जाता है तो ये लोग उसे बलपूर्वक तरीके से बंद करा देते है और जिला प्रशासन इनके आगे बौना बना तमाशा देखते रहता है l

