बोकारो। झारखंड के बोकारो से आई यह घटना देश को झकझोर देने वाली है। एक युवक ने अपनी प्रेमिका की बेरहमी से हत्या कर दी, इतनी निर्ममता कि उसने करीब 100 बार चाकू से वार किए। वारदात के बाद शव को जंगल में फेंक दिया गया, जहां महीनों बाद कंकाल के रूप में उसके अवशेष बरामद हुए।
मां की लड़ाई बनी इंसाफ की वजह
जानकारी अनुसार, पीड़िता की मां लगातार अपनी बेटी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराने थाने के चक्कर लगाती रही, लेकिन पुलिस ने शुरुआत में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं की। जब हर दरवाजा बंद हो गया, तब उन्होंने झारखण्ड उच्च न्यायालय का रुख किया। यही फैसला इस पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट बना।
हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद जांच तेज हुई और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए। जांच में सामने आया कि थाना स्तर पर न सिर्फ लापरवाही बरती गई, बल्कि आरोपी को बचाने के लिए जानबूझकर केस को कमजोर किया गया।
एक साथ 28 पुलिसकर्मी सस्पेंड
बता दें मामले की गंभीरता को देखते हुए बोकारो पुलिस प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया। पिण्ड्राजोरा थाने के 28 पुलिसकर्मियों को एक साथ निलंबित कर दिया गया। इनमें सब-इंस्पेक्टर, एएसआई, हवलदार और सिपाही शामिल हैं। आरोप है कि कई पुलिसकर्मियों ने आरोपी के साथ मिलीभगत कर केस को दबाने की कोशिश की।
नई SIT ने कुछ ही घंटों में सुलझाया केस
सूत्रों के मुताबिक, नई विशेष जांच टीम (SIT) के गठन के बाद मामला तेजी से खुला। टीम ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया और उसकी निशानदेही पर जंगल से कंकाल की 19 हड्डियां, कपड़े और हत्या में इस्तेमाल चाकू बरामद किया। इससे साफ हो गया कि अगर शुरुआत में ही सही जांच होती, तो सच बहुत पहले सामने आ सकता था।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ पुलिसकर्मी आरोपी के साथ संपर्क में थे। उन पर केस को रफा-दफा करने के लिए पैसे लेने और निजी मेलजोल रखने के आरोप लगे हैं। यह मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि सिस्टम की बड़ी विफलता का उदाहरण बन गया है।
घटना की टाइमलाइन
बताया जा रहा है कि 24 जुलाई 2025 को 18 वर्षीय युवती घर से निकली थी और उसी दिन उसकी हत्या कर दी गई। आरोपी उसे बहला-फुसलाकर जंगल ले गया और वारदात को अंजाम दिया। मां शुरुआत से ही एक पड़ोसी युवक पर शक जता रही थी, लेकिन पुलिस ने उसकी बात को नजरअंदाज किया।

