बेगमगंज: ग्राम भुरेरु के करीब 150 पशुपालकों ने वनभूमि पर कथित अतिक्रमण और तार फेंसिंग किए जाने को लेकर वन विभाग के वन परिक्षेत्राधिकारी को ज्ञापन सौंपा। पशुपालकों ने आरोप लगाया कि बेलों वाले से हरजू वाले झिरना तक गोचर के रास्ते पर कब्जा होने से करीब एक हजार पशुओं को चराने ले जाने में परेशानी हो रही है। उन्होंने तत्काल अतिक्रमण हटाकर पशुओं के लिए रास्ता खोलने की मांग की है।
तार फेंसिंग से बंद हुआ गोचर का रास्ता
पशुपालकों का कहना है कि वनभूमि पर कथित रूप से तार फेंसिंग कर खेती की जा रही है। इससे गोचर क्षेत्र प्रभावित हुआ है और जंगल से होकर जाने वाला रास्ता भी बंद हो गया है। उनका दावा है कि पिछले वर्ष वन विभाग ने इस क्षेत्र से अतिक्रमण हटाकर संबंधित लोगों को बेदखल किया था, लेकिन इस वर्ष फिर से वहां कब्जे की स्थिति बन गई है।
कीचड़ भरे रास्ते से निकल रहे पशु
ज्ञापन में पशुपालकों ने बताया कि फिलहाल पशुओं के आने-जाने के लिए एक संकरा रास्ता बचा है, जो बारिश के कारण कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष इसी रास्ते पर कीचड़ में फंसने से चार दुधारू पशुओं की मौत हो गई थी। पशुपालकों ने यह भी आरोप लगाया कि रास्ते को लेकर चरवाहों और कथित अतिक्रमणकारियों के बीच आए दिन विवाद की स्थिति बनती है।\
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वनभूमि की सीमा सुरक्षित करने की मांग
पशुपालकों ने वन विभाग से भुरेरु बीट में बेलों वाले से हरजू वाले झिरना तक कथित अतिक्रमण और तार फेंसिंग हटाने की मांग की है। साथ ही वनभूमि की सीमा के चारों ओर खंती खुदवाकर क्षेत्र को सुरक्षित करने और पशुओं के लिए गोचर का रास्ता बहाल करने की मांग की गई है।
ज्ञापन देने वालों में कमलेश साहू, निशांत साहू, नरेंद्र मोतीलाल साहू, गंगाराम, बाबूलाल, रामकुमार, शिवराम ठाकुर, रवि, श्रीराम, गौरीशंकर, छोटू ठाकुर, राकेश, परसराम, दुर्जन, मलखान सिंह, गोविंद और भगवान दास सहित करीब 150 पशुपालक शामिल रहे।

