42 दिन बाद भी नहीं हुई आरोपियों की गिरफ्तारी, धनोरा थाना पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

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भोपाल। सिवनी जिले के धनोरा थाना क्षेत्र से पुलिस कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। निजी भूमि पर अवैध अतिक्रमण, राजस्व न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और अतिक्रमण हटाने के दौरान हुए जानलेवा हमले के बावजूद अधिकांश आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने को लेकर वरिष्ठ पत्रकार एवं आरटीआई कार्यकर्ता विजय डोंगरे ने पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश को लिखित शिकायत भेजी है।

निजी भूमि पर फसल नष्ट कर बनाई जा रही थी बाउंड्री वॉल

मामले के अनुसार पीड़ित प्रदीप दुबे (35 वर्ष), निवासी ग्राम देवरीटीका, तहसील घंसौर, जिला सिवनी की निजी भूमि खसरा नंबर 248, रकबा 1.43 हेक्टेयर पर ग्राम पंचायत के सरपंच, ठेकेदार और हाईस्कूल देवरीटीका के प्राचार्य द्वारा फसल नष्ट कर अवैध रूप से बाउंड्री वॉल निर्माण कराया जा रहा था। इस संबंध में पीड़ित ने 3 मार्च 2025 को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी थी।

तहसीलदार ने जारी किए स्थगन और बेदखली आदेश

शिकायत के बाद तहसीलदार धनोरा द्वारा 2 अप्रैल 2025 को स्थगन आदेश जारी कर निर्माण कार्य रुकवाया गया। बाद में पुनः निर्माण शुरू होने पर 17 अप्रैल 2025 को दोबारा स्थगन आदेश और 19 मई 2025 को बेदखली आदेश जारी किया गया। 26 मई 2025 को कब्जा वारंट भी जारी हुआ, लेकिन आरोपियों ने आदेशों का पालन नहीं किया।

अतिक्रमण हटाने के दौरान पीड़ित पर जानलेवा हमला

जानकारी अनुसार, 12 सितंबर 2025 को राजस्व निरीक्षक द्वारा धनोरा थाना प्रभारी को अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस बल उपलब्ध कराने का पत्र भेजा गया। जिसके बाद 17 सितंबर 2025 को राजस्व और पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई। इसी दौरान मौके पर पहुंचे पीड़ित प्रदीप दुबे पर सरपंच, पंच, ठेकेदार सहित अन्य लोगों ने लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया।

एफआईआर दर्ज, लेकिन केवल एक आरोपी गिरफ्तार

बता दें हमले के बाद धनोरा थाना पुलिस ने अपराध क्रमांक 0333/2025 दर्ज कर एक दर्जन आरोपियों को नामजद किया, लेकिन 42 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने केवल एक आरोपी नरेश राय की गिरफ्तारी की। शेष आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

वरिष्ठ पत्रकार विजय डोंगरे ने पुलिस महानिदेशक को भेजी शिकायत में आरोप लगाया है कि धनोरा थाना पुलिस आरोपियों को संरक्षण दे रही है और जानबूझकर गिरफ्तारी नहीं की जा रही। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
यह मामला न केवल राजस्व आदेशों की अवहेलना को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में स्थानीय पुलिस किस तरह ढिलाई बरत रही है। अब निगाहें पुलिस मुख्यालय और राज्य प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।