इंदौर: रविवार का दिन इंदौर के इतिहास में भावनाओं से भरा एक ऐसा पल बन गया, जिसे शहर लंबे समय तक नहीं भूल पाएगा। कुछ ही सप्ताह पहले जिस घर में शादी की शहनाइयां गूंज रही थीं, उसी घर में अब मातम पसरा था। भारतीय सेना के जांबाज अधिकारी मेजर हमजा आरिफ की तिरंगे में लिपटी पार्थिव देह जब अपने शहर पहुंची, तो हर आंख नम हो गई। पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ इंदौर ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।
सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब
सुबह सैफी नगर में जनाजे की नमाज के बाद मेजर हमजा आरिफ की अंतिम यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा माणिकबाग पुल, कलेक्टर चौराहा, राजबाड़ा और सदर बाजार होते हुए इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंची।रास्ते भर हजारों लोग अपने घरों, दुकानों और चौराहों पर खड़े होकर हाथ जोड़ते, सलामी देते और फूल बरसाते नजर आए। राजबाड़ा पर जैसे ही सेना का वाहन पहुंचा, पूरा इलाका “भारत माता की जय” और “मेजर हमजा आरिफ अमर रहें” के नारों से गूंज उठा।
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पत्नी के हाथों में सौंपा तिरंगा
अंतिम विदाई का सबसे मार्मिक पल तब आया, जब मेजर की पत्नी ज्योति अरोरा अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना के अधिकारियों ने सम्मानपूर्वक तिरंगा उन्हें सौंपा। तिरंगे को सीने से लगाकर वह खुद को संभाल नहीं सकीं। उनकी आंखों से छलकते आंसुओं ने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया।
अचानक आई दुखद खबर
परिजनों ने बताया कि मेजर हमजा आरिफ का विवाह करीब एक महीने पहले ही हुआ था। शादी के बाद कुछ दिन परिवार के साथ बिताकर वह फिर देश सेवा के लिए ड्यूटी पर लौट गए थे। किसी ने नहीं सोचा था कि नई जिंदगी की शुरुआत के कुछ ही दिनों बाद उनकी घर वापसी तिरंगे में होगी।
ड्यूटी से लौटते समय हुआ दर्दनाक हादसा
गौरतलब है कि गुरुवार देर रात राजस्थान के जैसलमेर जिले में ड्यूटी पूरी कर लौटते समय सेना की टाटा सफारी अचानक सड़क पर आए एक ऊंट से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन कई बार पलट गया। इस हादसे में 31 वर्षीय मेजर हमजा आरिफ ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि उनके साथ मौजूद दो लेफ्टिनेंट गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों का इलाज सैन्य अस्पताल में जारी है।
9 साल तक देश सेवा
मेजर हमजा आरिफ पिछले नौ वर्षों से भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनके पिता आरआर कैट से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में माता-पिता, तीन बहनें और पत्नी हैं। उनके असमय निधन से सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरा इंदौर और देश शोक में डूब गया।
मेजर हमजा आरिफ की अंतिम यात्रा में सेना के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य और बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए। पूरे सैन्य सम्मान और धार्मिक परंपराओं के साथ उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। नम आंखों और गर्व से भरे दिलों के साथ इंदौर ने अपने वीर सपूत को अंतिम सलाम किया।

