नई दिल्ली: त्योहारों से पहले आम लोगों की रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ने लगा है। चीनी के बाद अब प्याज की बढ़ती कीमतें परेशानी बढ़ा रही हैं। कई बाजारों में प्याज 55 से 60 रुपए प्रति किलो तक बिक रहा है। वहीं ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म पर इसकी कीमत करीब 65 से 68 रुपए प्रति किलो तक देखने को मिल रही है।
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब साढ़े तीन महीनों में प्याज की कीमतों में 82% से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जून से लगातार बढ़ रहे प्याज के दाम
जून में खुदरा बाजार में प्याज करीब 29 से 30 रुपए प्रति किलो मिल रहा था। सितंबर के मध्य तक इसकी कीमत बढ़कर लगभग 53 से 55 रुपए प्रति किलो पहुंच गई। यानी तीन से साढ़े तीन महीने में कीमत करीब 82% बढ़ गई।
थोक बाजार में भी यही स्थिति है। जून में प्याज का औसत थोक भाव करीब 22.60 रुपए प्रति किलो था, जो सितंबर के पहले सप्ताह में बढ़कर लगभग 46.20 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया।
आखिर क्यों महंगा हो रहा प्याज?
प्याज की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। महाराष्ट्र सहित प्रमुख उत्पादक इलाकों में ज्यादा गर्मी और बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे बाजार में उपलब्ध पुराने प्याज का स्टॉक तेजी से कम हुआ है।
दूसरी तरफ खरीफ की नई फसल बाजार में पहुंचने में समय लग रहा है। पुराना स्टॉक कम होने और नई फसल की आवक शुरू नहीं होने से सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। बारिश और बाढ़ के कारण कुछ इलाकों में ट्रांसपोर्ट और सप्लाई भी प्रभावित हुई है। इसी बीच त्योहारी सीजन की मांग बढ़ने से कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।
‘कांदा एक्सप्रेस’ और बफर स्टॉक से राहत की कोशिश
बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार बफर स्टॉक से प्याज बाजार में उतारने सहित सप्लाई बढ़ाने के उपाय कर रही है। प्याज को तेजी से बाजारों तक पहुंचाने के लिए रेल परिवहन यानी ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसे विकल्पों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बावजूद फिलहाल खुदरा बाजार में कीमतों में बड़ी राहत नजर नहीं आ रही है।
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नई फसल आने पर कम हो सकते हैं दाम
बाजार में खरीफ प्याज की आवक बढ़ने के बाद सप्लाई की स्थिति बेहतर होने की उम्मीद है। अगर नई फसल पर्याप्त मात्रा में मंडियों तक पहुंचती है तो आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि मौसम और आवक की स्थिति इसमें अहम भूमिका निभाएगी।

