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बजट से पहले प्रदेश पर बढ़ते कर्ज को लेकर राजनीतिक घमासान तेज, सरकार पर कांग्रेस हुई हमलावर

भोपाल। आरबीआई की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश पर लगातर बढ़ते कर्ज का खुलासा होने के बाद राजनीतिक रस्साकशी का दौर प्रारंभ हो गया। बतादें कि बीते एक साल में ही प्रदेश सरकार ने 60 हजार करोड़ का कर्ज लिया है। अब तक प्रदेश पर पांच लाख करोड़ से अधिक का कर्ज हो गया है जिससे प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर औसतन 60 हजार रूपए के बोझ से दब गया है। इधर लाड़ली बहना जैसे अनउपयोगी योजनाओं में सरकार सालाना हजार करोड़ से अधिक की राशि खर्च कर रही है वहीं योजनाओं में धांधली और भ्रष्टाचार के चलते लोगों को उचित लाभ भी नहीं मिल रहा है। जिसका ज्वलंत उदाहरण इंदौर, भागीरथपुरा और छिंदवाड़ा का कफसीरप मामले में दजर्नों मौतें हैं;
पांच लाख करोड़ रुपये के बढ़ते कर्ज को लेकर कांग्रेस ने सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का कहना है कि राज्य के हर नागरिक पर कर्ज का लगभग 60 हजार रुपये का बोझ हो चुका है, जबकि सरकार आर्थिक प्रगति के झूंटे दावे करत रही है। पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि जिन विभागों में मासूमों की मौत हुई, उन मंत्रियों को बजट देना निरर्थक है। उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे लोगों को वित्तीय समर्थन देना जनता के साथ अन्याय है।
बजट सत्र के दौरान किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा सरकार में प्रदेश की 29 योजनाएं बंद हो चुकी हैं और कई महत्वपूर्ण विभाग संसाधनों के अभाव में लड़खड़ा रहे हैं। हड़ताल और आंदोलनों में शामिल विभिन्न संगठनों को भी कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए बजट आवंटन लगातार कम किया जा रहा है, जबकि कर्ज बढ़ता जा रहा है। उनका आरोप है कि पूंजीगत निवेश कम होने से आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी टकराव और तेज़ होने की संभावना है।

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