भोपाल। प्रदेश में संचालित किराए की आंगनवाड़ी केंद्रों को अब सरकारी स्कूलों के खाली कमरों में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू हो गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने ऐसे केंद्रों की पहचान का काम तेज कर दिया है, जिनके संचालन पर हर महीने किराया खर्च हो रहा है। सरकार इसे संसाधनों के बेहतर उपयोग और खर्च में कमी की दिशा में बड़ा कदम मान रही है।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सामाजिक योजनाओं पर लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच विभाग अब संचालन संबंधी खर्चों को सीमित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। खासतौर पर बड़ी कल्याणकारी योजनाओं के चलते बजट पर बढ़े भार के बाद किराए पर चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को सरकारी भवनों में समायोजित करने का फैसला लिया गया है। विभागीय निर्देशों के बाद अधिकारियों को ऐसे सरकारी स्कूलों की सूची तैयार करने को कहा गया है, जहां अतिरिक्त कमरे उपलब्ध हैं। इन्हीं कमरों में आंगनवाड़ी केंद्रों को शिफ्ट किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे लाखों रुपए के मासिक किराए की बचत होगी और सरकारी भवनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
क्या होगा असर ?
हालांकि इस योजना को लेकर शिक्षा और बाल विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि कई सरकारी स्कूल पहले से ही कमरों की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसे में आंगनवाड़ी गतिविधियों के लिए स्कूल परिसर का उपयोग करने से विद्यार्थियों की पढ़ाई और छोटे बच्चों की देखरेख दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
क्या होता है आंगनबाड़ियों में ?
प्रदेश की आंगनवाड़ी केंद्रों में 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों को पोषण आहार, प्रारंभिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं की स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण, वजन मापन और पोषण संबंधी परामर्श भी यहीं दिए जाते हैं। इसके अलावा प्री-स्कूल गतिविधियां, पोषण अभियान, महिला जागरूकता और किशोरी बालिकाओं से जुड़ी योजनाएं भी इन्हीं केंद्रों के माध्यम से संचालित होती हैं।

