देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बहनों और भाइयों, अंकिता हत्याकांड हमारी संस्कृति, हमारी गरिमा, हमारी अस्मिता पर किए जाने वाला हमला है। अंकिता ने स्वयं एक VIP का जिक्र किया, जिसको विशेष सेवा देने के लिए उसका मालिक उसके ऊपर दबाव डाल रहा था, प्रलोभन भी उसने दिए, लेकिन अंकिता ने इनकार कर दिया और उसके परिणामस्वरूप वो मार दी गई।
एसआईटी ने कभी भी वीआईपी की खोज नहीं की
उन्होंने कहा कि हमारी नजर में वो उत्तराखंड की शहीद है। आप सब बहुत उद्वेलित हुए। मगर क्रमशः पहले साक्ष्य मिटाने का प्रयास हुआ, फिर साक्ष्य जुटाने में कोताही की गई। आप अंदाज लगाइए कि अंकिता का और पुलकित का मोबाइल अभी तक भी बरामद नहीं हुआ, जबकि वह एक महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकता है, पुलकित को फांसी के फंदे तक पहुंचाने के लिए। एसआईटी ने कभी भी वीआईपी की खोज नहीं की। भाजपा के घर से जब यह बात आई कि वह वीआईपी कोई और नहीं, बल्कि उस समय के भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी हैं, तो एक बार फिर आक्रोश की लहर फैल गई।
लोगों के मन का संदेह दूर करना चाहिए
हरीश रावत ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकार ने सीबीआई को जांच सौंपी। सीबीआई ने अभी यह नहीं बताया कि जिस व्यक्ति को उत्तराखंड के लोग अंकिता की हत्या का दोषी वीआईपी मान रहे हैं, वह वो व्यक्ति नहीं है जिसे राज्यपाल बनाया गया, कोई रिपोर्ट अभी तक नहीं आई है। लोगों के मन में जो संदेह है, वो बना हुआ है और संदेह को कई तरीके से लोगों ने प्रकट भी किया है। सरकार ने उस व्यक्ति को राज्यपाल बना दिया और हमारे स्वाभिमान को ललकारा।
सिक्किम के भाई-बहनों का धन्यवाद
आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि मैं सिक्किम के भाई-बहनों को बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। वो अनेक तरीके से विरोध प्रकट कर रहे हैं, जिसमें 19 तारीख को सिक्किम बंद भी कर रहे हैं। उत्तराखंड में भी विरोध प्रकट हो रहा है। मैं आप सबसे एक प्रार्थना करना चाहता हूं कि आप नवरात्रि में कन्या पूजन करते हैं। अंकिता भी हम सब की कन्या है। आप एक कन्या को अंकिता मान करके उसका पूजन करिए और हो सके तो अपने फेसबुक में, किसी तरीके से और माध्यम से इस बात को बाहर भी लाइए, ताकि एक जन-दबाव पैदा हो सके।

