नई दिल्ली: प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा से पारित होने के बाद ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ गुरुवार को राज्यसभा में चर्चा के लिए पेश किया गया। विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा कि सरकार पेपर लीक के मामलों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए हुए है और किसी को भी देश के युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
लोकसभा से मिली मंजूरी, अब राज्यसभा में चर्चा
बुधवार को लोकसभा में ध्वनिमत से पारित होने के बाद अब यह विधेयक राज्यसभा में चर्चा और पारित होने की प्रक्रिया से गुजर रहा है। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए यह संशोधन आवश्यक है।
बता दें राज्यसभा में चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार इस विधेयक को पूरी गंभीरता के साथ लेकर आई है और सभी दलों व सदस्यों के रचनात्मक सुझावों का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी पर अपनी बात थोपना नहीं, बल्कि एक ऐसा मजबूत कानून बनाना है जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
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‘पेपर लीक पर जीरो टॉलरेंस’ का दोहराया संकल्प
साथ ही केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक के मामलों ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य से किसी भी तरह का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
विधेयक पर चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने बताया कि पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं में गड़बड़ी से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की व्यवस्था का भी प्रावधान किया गया है। इससे ऐसे मामलों में जल्द सुनवाई और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने सदन में पूर्व वर्षों में विभिन्न सरकारों के कार्यकाल के दौरान सामने आए पेपर लीक मामलों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अब सरकार इस समस्या पर स्थायी और प्रभावी समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।

