शनिवार शाम हुए इस हादसे के बाद पंडाल की लाइटें बंद कर दी गईं और श्रद्धालुओं का प्रवेश रोक दिया गया। शहर के कई अन्य दुर्गापूजा पंडाल भी बंद कर दिए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए सीसीटीवी फुटेज खंगालने के साथ आयोजक समिति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया है।
मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये और सरकारी नौकरी
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों को समुचित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की। घायलों को पांच-पांच लाख रुपये की सहायता दी जाएगी। हादसे की जांच हाईकोर्ट के न्यायाधीश की अगुवाई वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
संकरे रास्ते और कम रोशनी से बढ़ी परेशानी
पुलिस के अनुसार, रात करीब 7:40 बजे बारिश के दौरान पंडाल के निकास द्वार पर भारी भीड़ जमा होने से अफरा-तफरी मची। बारिश से बचने के लिए लोग पंडाल के भीतर जाने की कोशिश कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों ने प्रवेश और निकास के रास्ते संकरे होने तथा रोशनी कम होने की बात कही है।
पंडाल में बाहर निकलने के लिए 360 डिग्री घूमकर जाने वाला गोलाकार, ऊंचा गलियारा बनाया गया था। इसी हिस्से में भीड़ का दबाव बढ़ने और ढांचे का एक हिस्सा टूटने की आशंका जताई गई है। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
आंखों के सामने छूटा अपनों का हाथ
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ में एक लड़की के गिरने के बाद लोग उसे कुचलते हुए आगे बढ़ते गए। एंबुलेंस पहुंचने में देरी के कारण कुछ बेसुध श्रद्धालुओं को मोटरसाइकिलों से अस्पताल ले जाया गया।
एक बुजुर्ग अपनी घायल बेटी और नन्हीं पोती की सलामती के लिए अस्पताल में बिलखते रहे। नदिया से आए एक व्यक्ति ने बताया कि वह पत्नी और रिश्तेदार की बेटी को पूजा दिखाने लाया था। भगदड़ में उसने पत्नी को आंखों के सामने गिरते देखा, लेकिन भीड़ के दबाव के कारण उसे बचा नहीं सका।
हादसे के बाद पुलिस सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण और निकास मार्गों की स्थिति की जांच कर रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा में हुई संभावित चूक और जिम्मेदार लोगों की भूमिका अब जांच के केंद्र में है।

