बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में बैंक ऑफ महाराष्ट्र की मोरखा शाखा में 1 करोड़ 14 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी के मामले में पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान शैलेंद्र सोनी, मिथिलेश सोनी और मयंक सोनी के रूप में हुई है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस मामले में एक नाबालिग के माध्यम से पांच अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस अब खातों में हुए लेनदेन, रकम के इस्तेमाल और इस कथित धोखाधड़ी से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
पंजीकृत मोबाइल नंबर बदलकर रकम निकालने का आरोप
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खाताधारकों की बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी का कथित रूप से दुरुपयोग किया। आरोप है कि पहले बैंक खातों में पंजीकृत मोबाइल नंबर बदले गए। इसके बाद खाताधारकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में जमा रकम दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित कर दी गई।
इस कथित धोखाधड़ी का पता चलने पर प्रभावित खाताधारकों ने पुलिस से शिकायत की। शिकायतों के आधार पर बोरदेही थाने में छह अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने मामले में कथित रूप से इस्तेमाल किए गए मोबाइल फोन और सिम कार्ड भी जब्त किए हैं। जांच में बैंकिंग जानकारी तक पहुंच बनाने और रकम को दूसरे खातों में भेजने के तरीके की पड़ताल की जा रही है।
इन खातों में पहुंची लाखों रुपये की रकम
पुलिस जांच में कई बैंक खातों में रकम स्थानांतरित किए जाने की जानकारी सामने आई है। बैंक के सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे की मां शीला गोखे के खाते में 17 लाख 15 हजार 144 रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, सहायक प्रबंधक लुकेश गोखे के अपने खाते में भी 1 लाख 78 हजार रुपये स्थानांतरित हुए थे।
नए गिरफ्तार आरोपी मयंक सोनी के खाते में 1 लाख 45 हजार 800 रुपये पहुंचने की जानकारी मिली है। इसके अलावा, मिथिलेश सोनी के खाते में 61 हजार रुपये और शैलेंद्र सोनी के खाते में 1 लाख 50 हजार रुपये ट्रांसफर किए जाने की बात जांच में सामने आई है।
नाबालिग के इस्तेमाल और अन्य खातों की जांच
मामले में नाबालिग के माध्यम से पांच खातों में रकम स्थानांतरित किए जाने का खुलासा होने के बाद पुलिस लेनदेन की पूरी कड़ी जोड़ने में जुटी है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अलग-अलग खातों में भेजी गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया और इस प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।
तीन और गिरफ्तारियों के बाद पुलिस संभावित सहयोगियों, अन्य बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। फिलहाल, आरोपियों की भूमिका और कथित धोखाधड़ी से जुड़े सभी पहलुओं का निर्धारण जांच के आधार पर होगा।

