बालाघाट: रमाताई महिला बौद्ध संघ, बालाघाट द्वारा संचालित पंचशील बुद्ध विहार, समता भवन, बुढ़ी बालाघाट में इस वर्ष पूज्य भिक्खुनी बुद्ध कन्या थेरी वर्षावास करेंगी। संघ की पदाधिकारियों द्वारा की गई विनम्र याचना को स्वीकार करते हुए उन्होंने अपनी सहमति प्रदान की है, जिससे बौद्ध उपासकों में खुशी का माहौल है।
29 जुलाई को होगा मंगल प्रवेश
पूज्य भिक्खुनी बुद्ध कन्या थेरी का बालाघाट में वर्षावास के लिए 29 जुलाई को सुबह 8 बजे मंगल प्रवेश होगा। इस अवसर पर बौद्ध समाज के श्रद्धालु एवं उपासक-उपासिकाएं उपस्थित रहेंगे।
आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होगा वर्षावास
भगवान बुद्ध द्वारा स्थापित परंपरा के अनुसार, धम्म चक्र प्रवर्तन दिवस और वर्षावास को पालि भाषा में ‘वस्सावास’ कहा जाता है। इस वर्ष वर्षावास की शुरुआत त्रिविध पावनी आषाढ़ पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 से होगी और इसका समापन आश्विन पूर्णिमा 26 अक्टूबर 2026 को होगा। बौद्ध धम्म में वर्षावास का विशेष महत्व है। इस अवधि में भिक्खू और भिक्खुनियां आध्यात्मिक साधना, अध्ययन और ज्ञान प्राप्ति के लिए अधिक समय समर्पित करते हैं।
भिक्खुनी बुद्ध कन्या थेरी का जीवन परिचय
पूज्य भिक्खुनी बुद्ध कन्या थेरी मूल रूप से कारंजा (लाड़), जिला वाशिम, महाराष्ट्र की निवासी हैं। बौद्ध धम्म के प्रति उनकी गहरी आस्था और समर्पण के कारण उन्होंने कम उम्र में ही प्रव्रज्जा का मार्ग अपनाया। 22 नवंबर 2002 को महाराष्ट्र में उनकी प्रव्रज्जा सम्पन्न हुई। इसके बाद 5 जुलाई 2008 को श्रीलंका में पूज्य भिक्खुणी सुमित्रा महाथेरी के सान्निध्य में उनकी उपसम्पदा सम्पन्न हुई।
पालि विषय में हासिल की उच्च शिक्षा
शैक्षणिक क्षेत्र में भी भिक्खुनी बुद्ध कन्या थेरी का योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने नागपुर यूनिवर्सिटी से पालि विषय में एमए की उच्च शिक्षा प्राप्त की है।धम्म प्रचार और साधना के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहते हुए यह उनका 19वां वर्षावास होगा।
बौद्ध समाज में खुशी का माहौल
रमाताई महिला बौद्ध संघ, बालाघाट के पदाधिकारियों और उपासक-उपासिकाओं ने पूज्य भिक्खुनी बुद्ध कन्या थेरी के आगमन और वर्षावास को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे बालाघाट के बौद्ध समाज के लिए एक महत्वपूर्ण और हर्ष का अवसर बताया है।

