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बीजेपी ने जारी किया विधायक प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में बड़ा डेवलपमेंट सामने आया है। बीजेपी ने शिवपुरी के पिछोर से विधायक प्रीतम सिंह लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। पार्टी ने उनके हालिया बयानों और व्यवहार को गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए 3 दिनों के भीतर जवाब देने को कहा है। नोटिस में साफ चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला, तो कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस कदम को पार्टी की ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तौर पर देखा जा रहा है।

किसने जारी किया नोटिस

जानकारी के मुताबिक, यह नोटिस प्रदेश अध्यक्ष हेमन्त खंडेलवाल की ओर से जारी किया गया है। इसकी कॉपी संगठन और सरकार के कई शीर्ष नेताओं को भी भेजी गई है, जिनमें प्रमुख रूप से मोहन यादव, शिवप्रकाश, अजय जामवाल, महेंद्र सिंह और सतीश उपाध्याय शामिल हैं। इससे साफ है कि मामला सिर्फ प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व की निगरानी में भी आ गया है।

विवाद की जड़

पूरा विवाद 16 अप्रैल को शिवपुरी जिले के करैरा में हुए सड़क हादसे से शुरू हुआ। आरोप है कि विधायक के बेटे की SUV ने पांच लोगों को टक्कर मार दी। इस मामले में कार्रवाई करते हुए एसडीओपी आयुष जाखर ने कानूनी प्रक्रिया शुरू की।

इसके बाद विधायक का एक वीडियो सामने आया, जिसमें वे एसडीओपी को धमकी देते और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते दिखे। इस बयान ने पूरे मामले को राजनीतिक विवाद में बदल दिया।

वायरल वीडियो से बढ़ा दबाव

बता दें सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने मामले को और संवेदनशील बना दिया। क्लिप में विधायक द्वारा कथित तौर पर ‘करैरा तेरे डैडी का नहीं है’ और सरकारी आवास को नुकसान पहुंचाने जैसी धमकी भरी बातें कही गईं। इस घटनाक्रम ने न सिर्फ विपक्ष को हमला करने का मौका दिया, बल्कि पार्टी के लिए भी इमेज मैनेजमेंट एक बड़ी चुनौती बन गई।

IPS एसोसिएशन और कर्मचारी संगठनों का विरोध

इस मामले पर भारतीय पुलिस सेवा संघ ने भी कड़ा रुख अपनाया। एसोसिएशन ने विधायक की भाषा को अभद्र और अस्वीकार्य बताते हुए कार्रवाई की मांग की। वहीं, राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि यदि अधिकारियों को धमकाने के मामलों में सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि विधायक की ओर से क्या जवाब आता है और पार्टी उस पर क्या फैसला लेती है। क्या यह मामला सिर्फ नोटिस तक सीमित रहेगा, या फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई का बड़ा कदम उठाया जाएगा?

 

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