20 साल की उपेक्षा का दर्द छलकाः बीजेपी नेता गोपाल भार्गव बोले मैंने सहा है, लोग 20 महीने नहीं टिक पाते

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सागर। मध्यप्रदेश भाजपा में अंतर्कलह की आवाजें भले ही खुलकर सामने नहीं आतीं, लेकिन समय-समय पर वरिष्ठ नेताओं के बयान संगठन की अंदरूनी स्थिति को उजागर कर देते हैं। ऐसा ही दर्द एक बार फिर सागर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता और रहली विधायक गोपाल भार्गव के शब्दों में छलक गया।
पूर्व मंत्री भार्गव ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीति में उपेक्षा किसी भी व्यक्ति को भीतर से कमजोर कर देती है। उन्होंने साफ कहा कि वे बीते 20 वर्षों से लगातार संगठनात्मक और राजनीतिक उपेक्षा को झेलते आ रहे हैं, जबकि आज के दौर में लोग 20 महीने भी संघर्ष नहीं कर पाते। उनके इस बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
गोपाल भार्गव ने खुलासा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कभी उन्हें कांग्रेस में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकराते हुए कहा था, यह माल टिकाऊ है, बिकाऊ नहीं। उन्होंने इसे अपनी निष्ठा और सिद्धांतों की राजनीति से जोड़ा।
उन्होंने कहा कि उन्होंने पूरा जीवन पार्टी को समर्पित किया है, लेकिन लंबे समय से मिल रही अनदेखी दर्द देती है। खासतौर पर मोहन यादव सरकार में उन्हें मंत्री पद न मिलने के बाद से उनकी नाराजगी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगी है। इससे पहले भी वे कह चुके हैं कि “हर जगह ब्राह्मणों को ही निशाना बनाया जा रहा है”, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई थी।
सागर जिले की रहली विधानसभा से कई बार विधायक चुने गए गोपाल भार्गव भाजपा के वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वे लोक निर्माण विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास जैसे अहम विभागों के मंत्री रह चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह बयान न सिर्फ व्यक्तिगत पीड़ा दिखाता है, बल्कि भाजपा के भीतर वरिष्ठ नेताओं की भूमिका और उपेक्षा से जुड़ी बहस को भी फिर हवा देता है। आने वाले दिनों में इस बयान का क्या राजनीतिक असर दिखेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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