मुंबई: भारत में शेयर खरीदना आज जितना आसान है, आने वाले समय में बॉन्ड में निवेश करना भी उतना ही आसान हो सकता है। मुंबई में आयोजित Bond Tokenisation Summit 2026 में विशेषज्ञों ने बताया कि Asset Tokenisation भारतीय बॉन्ड मार्केट में बड़ा बदलाव ला सकता है। खास बात यह है कि इससे छोटे निवेशकों के लिए भी बॉन्ड में पैसा लगाना आसान हो सकता है।
क्या है Bond Tokenisation?
आसान भाषा में समझें तो Tokenisation में किसी बॉन्ड या दूसरी वास्तविक संपत्ति को डिजिटल रूप में छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा जाता है। इससे बड़ी रकम वाला बॉन्ड भी कम राशि के साथ निवेश के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
E-Sutra के Co-founder कन्हैया सिंह ने कहा कि Tokenisation का मकसद Financial Services को ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। यह Cryptocurrency से अलग व्यवस्था है, क्योंकि यहां निवेश किसी Real World Asset से जुड़ा होता है।
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REC के ट्रायल में तेजी से हुआ Settlement
Summit में REC Ltd. के Executive Director मोहन लाल कुमावत ने कंपनी के Tokenised Bond Pilot की जानकारी दी। उनके मुताबिक जिस प्रक्रिया में सामान्य तौर पर दो से तीन दिन लग सकते हैं, Pilot में उसे करीब दो घंटे में पूरा किया गया।
ट्रायल के दौरान 20 Institutional Investors को सिस्टम से जोड़ा गया और इनमें से 18 को Allocation मिला। शुरुआत में Digital Wallet के लिए एक बैंक तैयार था, जबकि बाद में पांच बैंक नेटवर्क से जुड़ गए।
छोटे निवेशकों को क्या फायदा हो सकता है?
अभी कई बॉन्ड में बड़ी रकम की जरूरत होने के कारण Retail Investors की पहुंच सीमित रहती है। Tokenisation से इन्हें Fractional Units में बांटना संभव हो सकता है। यानी भविष्य में कम रकम से भी निवेश की शुरुआत की जा सकेगी।
हालांकि, छोटे निवेशकों को निश्चित रूप से 9% Return मिलेगा, ऐसा पूरी तरह से निश्चित नहीं है Yield संबंधित बॉन्ड, उसकी Credit Rating और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

