मप्र सरकार ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखकर एक नई बहस छेड़ दी है। नए भर्ती नियमों के अनुसार अब मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) लगभग सभी सरकारी भर्तियां करेगा, जबकि मप्र लोक सेवा आयोग (एमपी-पीएससी) केवल अपने दायरे की परीक्षाएं आयोजित करेगा। सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि अब सीधी भर्ती परीक्षाओं की जगह पात्रता परीक्षा और स्कोर कार्ड आधारित व्यवस्था लागू होगी। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने जा रही है।सरकार का तर्क है कि इससे भर्ती प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, केंद्रीकृत और व्यवस्थित बनेगी। सामान्य, तकनीकी और शिक्षक, इन तीन श्रेणियों में होने वाली पात्रता परीक्षाओं से अभ्यर्थियों को बार-बार अलग-अलग परीक्षाएं देने की परेशानी कम होगी। एक बार पात्रता प्राप्त कर लेने के बाद उसी स्कोर कार्ड के आधार पर विभिन्न विभागों में आवेदन किया जा सकेगा। इससे समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों की बचत होने की उम्मीद है। नकल और फर्जीवाड़े पर कठोर प्रावधान भी स्वागत योग्य हैं। परीक्षा में किसी और को बैठाना, नकली दस्तावेज देना या परीक्षा केंद्र पर ड्यूटी स्टाफ को धमकाना अब गंभीर अपराध माना जाएगा। हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ियों ने युवाओं का भरोसा कमजोर किया है, ऐसे में सख्ती जरूरी है। हालांकि, इस नई व्यवस्था के सामने कई सवाल भी खड़े होते हैं। यदि पात्रता परीक्षा का स्कोर लंबे समय तक मान्य रहेगा, तो क्या हर साल नए अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल पाएंगे? ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए कोचिंग आधारित प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है। साथ ही, सारी भर्तियां एक ही एजेंसी के पास केंद्रित होने से तकनीकी गड़बड़ी या देरी की स्थिति में पूरा भर्ती तंत्र प्रभावित हो सकता है। राज्य सरकार का यह कदम तभी सफल माना जाएगा, जब भर्ती प्रक्रिया तेज, निष्पक्ष और भरोसेमंद बनेगी। केवल नियम बदलने से नहीं, बल्कि पारदर्शी क्रियान्वयन से ही युवाओं का विश्वास जीता जा सकेगा। उम्मीद करते हैं कुछ तो बदलाव होगा।
-मिलिंद ठाकरे

