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लाल आतंक का अंत होते ही ईको टूरिज्म को बढ़ाने पर विचार कर रही छत्तीसगढ़ सरकार

नक्सलियों के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़, खुलेंगे विकास के द्वार
रायपुर। सदियों से एक उग्रवादी सोच और लाल आतंक के पर्याय बन चुके छत्तीसगढ़ केंद्र सरकार की प्रभावी रणनीति के चलते अब नक्सलवाद से छुटकारा पाने के द्वार पर खड़ा है। धीरे-धीरे इसका असर प्रभावित क्षेत्रों के अलावा प्रदेश सरकार की योजनाओं में साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। हाल ही में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेवस साय नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में ईको टूरिज्म का विस्तार बनाने की योजना बना रही है।
बस्तर में नक्सली आतंक की समाप्ति के साथ इको-टूरिज्म का विस्तार

कभी जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता था, वह लंबे समय तक संघर्षभूमि बनकर रह गया, परंतु आज तस्वीर बदल रही है। मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में बस्तर में नक्सलवाद का अंत अपनी अंतिम परिणति पर है। सुरक्षा बलों और सरकार की सटीक रणनीति और विकास की तेज रफ्तार ने इस क्षेत्र में नई ऊर्जा और उम्मीद जगी है। अब जब बस्तर में शांति का वातावरण लौट रहा है, तब पर्यटन के अनंत द्वार खुल रहे हैं। इको-टूरिज्म, सांस्कृतिक पर्यटन, स्थानीय उद्यमिता, सड़क और आधारभूत संरचना का विकास सब मिलकर बस्तर की एक नई पहचान गढ़ रहे हैं।
परिवर्तन की शुरुआत-मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का निर्णायक नेतृत्व
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने न सिर्फ सख्त सुरक्षा रणनीति अपनाई बल्कि साथ ही विकास और संवाद को भी प्राथमिकता देते हुए कहा है कि नक्सलवाद का अंत सिर्फ बंदूक से नहीं होगा। विकास और संवाद ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। आज उनकी यह नीति जमीन पर साकार रूप ले रही है। आज नक्सलवाद के ताबूत को बस अब अंतिम कील की प्रतीक्षा है। नक्सलवाद समापन के तौर पर पिछले डेढ़ सालों में कई ऐतिहासिक परिणाम समाने आए हैं जिसमें शामिल है 438 नक्सली का ढेर होना, 1515 नक्सलियों का गिरफ्तार होना और 1476 नक्सलियों का आत्मसमर्पण करना। यह आँकड़े बताते हैं कि सरकार की रणनीति निर्णायक और प्रभावशाली है

 

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