Saturday, November 7, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsनये सत्ता केंद्रों के जिम्मेदारों को मुख्यमंत्री की सीख

नये सत्ता केंद्रों के जिम्मेदारों को मुख्यमंत्री की सीख

मप्र में निगम, मंडल, प्राधिकरण और आयोगों में नियुक्त अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और पदाधिकारियों का हाल ही भोपाल में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सत्ता के नये केंद्रों के जिम्मेदारों को नसीहतें दीं। इसके साथ जिम्मेदारों को अनुशासन और व्यवहार का राजनीतिक पाठ पढ़ाया। आमतौर पर ऐसी नियुक्तियों के बाद शक्ति प्रदर्शन, समर्थकों की भीड़, वाहनों के काफिले और सोशल मीडिया पर आक्रामक उपस्थिति देखने को मिलती है। ऐसे माहौल में मुख्यमंत्री का यह कहना कि गलती करोगे, उलझोगे तो कोई मदद के लिए नहीं आएगा स्पष्ट संकेत है कि सरकार अब पद के साथ जवाबदेही भी तय करना चाहती है। दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां छोटे पदों पर बैठे नेताओं का व्यवहार सरकार और संगठन दोनों के लिए असहज स्थिति पैदा करता रहा। यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने अहंकार से बचने, जनप्रतिनिधियों से टकराव नहीं करने और सोशल मीडिया पर संयम रखने जैसी बातें विशेष रूप से कहीं। यह केवल व्यक्तिगत आचरण की सलाह नहीं, बल्कि भाजपा संगठन की उस चिंता का प्रतिबिंब है जिसमें स्थानीय स्तर पर नेताओं की कार्यशैली से सरकार की छवि प्रभावित होती है। मुख्यमंत्री द्वारा काम से पहचान बनाने की बात भी महत्वपूर्ण है। राजनीतिक नियुक्तियां अक्सर कार्यकर्ता संतुष्टि का माध्यम बन जाती हैं, लेकिन जनता इन पदों से परिणाम चाहती है। यदि निगम-मंडल केवल राजनीतिक समायोजन के केंद्र बनकर रह जाएंगे तो सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठना तय है। ऐसे में प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से पदाधिकारियों को प्रशासनिक प्रक्रिया, वित्तीय अनुशासन और सार्वजनिक व्यवहार की जानकारी देना सकारात्मक पहल माना जा सकता है। हालांकि असली चुनौती प्रशिक्षण नहीं, उसका पालन है। सत्ता मिलते ही व्यवहार बदल जाना भारतीय राजनीति की पुरानी बीमारी रही है। यदि मुख्यमंत्री की सीख केवल भाषण तक सीमित रही तो इसका कोई असर नहीं होगा। लेकिन यदि संगठन और सरकार वास्तव में जवाबदेही तय करते हैं, तो यह राजनीतिक संस्कृति में सुधार की शुरुआत भी बन सकती है। आखिरकार लोकतंत्र में पद की ताकत स्थायी नहीं होती, लेकिन व्यवहार और काम की छाप लंबे समय तक याद रखी जाती है।

-मिलिंद ठाकरे

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

1 to 7 November 2026
25 to 31 October 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन