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15 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक की सिफारिश

नई दिल्ली। बच्चों के बढ़ते डिजिटल मीडिया इस्तेमाल और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर एक नई रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की मांग की गई है। सेंटर फॉर लीगल एक्शन एंड बिहेवियर चेंज की रिपोर्ट में स्कूलों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने, बच्चों के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तक पहुंच की उम्र तय करने और डिजिटल कंपनियों की कानूनी जवाबदेही निर्धारित करने की सिफारिश की गई है।

‘प्रिवेंशन बाय डिजाइन: फ्रॉम वॉलंटरी सेल्फ-रेगुलेशन टू अ स्टेट ड्यूटी ऑफ केयर’ नामक यह रिपोर्ट न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से जुड़े एक कार्यक्रम में जारी की गई। रिपोर्ट में 40 से अधिक देशों में बच्चों के डिजिटल मीडिया इस्तेमाल और उम्र आधारित प्रतिबंधों का अध्ययन किया गया है। इसके अलावा 110 देशों की स्कूलों में स्मार्टफोन से जुड़ी नीतियों की तुलना भी की गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को अब केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म की स्वैच्छिक निगरानी पर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकारों को बच्चों की डिजिटल सुरक्षा के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी व्यवस्था तैयार करनी चाहिए। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कानूनी कार्रवाई और जुर्माने का प्रावधान करने की सिफारिश की गई है।

52 देशों में स्कूलों में स्मार्टफोन पर रोक

रिपोर्ट के अनुसार, जिन 110 देशों की स्कूल स्मार्टफोन नीतियों का अध्ययन किया गया, उनमें 52 देशों में राष्ट्रीय कानून के तहत स्कूलों में स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक है। 31 देशों ने स्मार्टफोन के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केवल नौ देशों में इस संबंध में फैसला अलग-अलग स्कूलों पर छोड़ा गया है।

रिपोर्ट में प्राथमिक और मिडिल स्कूल स्तर के विद्यार्थियों के स्कूल समय में स्मार्टफोन इस्तेमाल पर राष्ट्रीय स्तर पर रोक की सिफारिश की गई है।

15 साल तक सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक की मांग

रिपोर्ट में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल के लिए उम्र सीमा तय करने की भी सिफारिश की गई है। इसमें 15 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट बनाने से रोकने का सुझाव दिया गया है। साथ ही किशोरों के लिए उम्र के आधार पर अलग-अलग सुरक्षा उपाय लागू करने की बात कही गई है।

रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया के 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगाए गए प्रतिबंध का उदाहरण दिया गया है। चीन, इंडोनेशिया और मलेशिया में भी बच्चों की ऑनलाइन पहुंच को लेकर उम्र आधारित नियम लागू किए गए हैं या इस दिशा में कदम उठाए गए हैं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जरूरी

रिपोर्ट से जुड़े भुवन ऋभु ने कहा कि डिजिटल दुनिया में बच्चों को होने वाले नुकसान का स्तर बढ़ रहा है, लेकिन उससे बचाव की व्यवस्थाएं उसी गति से विकसित नहीं हुई हैं। उन्होंने सीमा पार होने वाले ऑनलाइन नुकसान से निपटने के लिए अनिवार्य रिपोर्टिंग और अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचे की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को बच्चों को ऐसे अनुबंधों या व्यवस्थाओं में शामिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, जो उनके अधिकारों और सुरक्षा को कमजोर करें। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि बच्चों को नुकसान होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय तकनीक और प्लेटफॉर्म के डिजाइन में ही सुरक्षा उपाय शामिल किए जाएं।

रिपोर्ट में बच्चों की गोपनीयता की सुरक्षा, डेटा संग्रह को सीमित करने और ऑनलाइन जोखिमों की जल्द पहचान के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर भी जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया से पूरी तरह दूर करना नहीं, बल्कि उनके लिए सुरक्षित और जिम्मेदार डिजिटल वातावरण तैयार करना बताया गया है।


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