भोपाल। मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाली ‘सोमनाथ स्वाभिमान यात्रा 2026’ का शुभारंभ भोपाल से भव्य तरीके से हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से विशेष तीर्थ ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान स्टेशन परिसर हर हर महादेव और जय सोमनाथ के जयघोष से गूंज उठा।
यह यात्रा सिर्फ तीर्थ दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और ऐतिहासिक गौरव से जुड़ने का एक बड़ा अभियान मानी जा रही है। पहली बार मध्यप्रदेश से रेल मार्ग के जरिए इतने बड़े स्तर पर सामूहिक सोमनाथ यात्रा का आयोजन किया गया है।
श्रद्धालुओं का विशाल कारवां
जानकारी अनुसार, इस विशेष यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब 1100 श्रद्धालु शामिल हुए हैं। भोपाल और उज्जैन से यात्रियों को लेकर यह ट्रेन गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर पहुंचेगी। यात्रा के दौरान श्रद्धालु पूजा-अर्चना, आध्यात्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे।

संस्कृति विभाग ने यात्रियों के लिए भोजन, आवास, सुरक्षा और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया है ताकि यात्रियों को सहज और सुरक्षित अनुभव मिल सके।
सोमनाथ भारत के स्वाभिमान का प्रतीक- CM मोहन
इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आत्मसम्मान का प्रतीक है। हजारों वर्षों के संघर्ष और आक्रमणों के बाद भी सनातन संस्कृति की ध्वजा लगातार लहराती रही है।
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विरासत से विकास’ विजन का जिक्र करते हुए कहा कि देश अब अपनी सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक विकास के साथ जोड़कर आगे बढ़ रहा है।
साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलता है। महाकाल लोक का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिससे होटल, व्यापार, परिवहन और स्थानीय रोजगार को नई गति मिली है। सरकार अब धार्मिक कॉरिडोर, हेलीकॉप्टर सेवा और स्पेशल तीर्थ ट्रेनों के जरिए प्रदेश को देश के बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है।
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व क्यों खास?
संस्कृति विभाग के अनुसार, यह यात्रा भारत की ऐतिहासिक विरासत, आस्था और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। यात्रा के माध्यम से श्रद्धालुओं को सोमनाथ मंदिर के इतिहास, उसके पुनर्निर्माण और भारतीय सभ्यता की दृढ़ता से परिचित कराया जाएगा। यह आयोजन धार्मिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
11 मई को होगा समापन
बत दें यह विशेष तीर्थ यात्रा 11 मई 2026 को संपन्न होगी। दर्शन और धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालु मध्यप्रदेश लौटेंगे। आयोजकों का कहना है कि यह यात्रा श्रद्धा के साथ-साथ सांस्कृतिक गर्व और राष्ट्रीय चेतना का संदेश लेकर आगे बढ़ रही है।

