भोपाल। मप्र पुलिस में 10 हजार पदों पर भर्ती की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी अनसुलझा है कि भर्ती प्रक्रिया आखिर कौन कराएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा पुलिस आरक्षक समेत विभिन्न पदों पर जल्द भर्ती की घोषणा किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने शासन को प्रस्ताव भेज दिया है, मगर भर्ती एजेंसी को लेकर अभी असमंजस बना हुआ है।
प्रस्ताव में 1,041 पद उप निरीक्षक और सूबेदार के भी शामिल हैं। अब शासन से स्वीकृति मिलने के बाद चयन प्रक्रिया शुरू होनी है, लेकिन पुलिस मुख्यालय चाहता है कि इससे पहले अलग पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन कर दिया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा सके। दरअसल, मुख्यमंत्री ने पिछले वर्ष पुलिस मुख्यालय की बैठक में अलग भर्ती बोर्ड बनाने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद मुख्यालय ने प्रस्ताव भी भेजा, लेकिन एक साल बाद भी मामला परीक्षण स्तर पर ही अटका हुआ है। अब गृह विभाग के नए अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता का अध्ययन करेंगे। इसके बाद सामान्य प्रशासन और विधि विभाग के साथ चर्चा कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड गठन को लेकर फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जल्द फैसला संभव है।
3 साल में होनी हैं इतनी भर्तियां
मप्र सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में 22,500 पुलिसकर्मियों की भर्ती करना है। वर्तमान में कर्मचारी चयन मंडल (ईएसबी) पर अन्य परीक्षाओं का दबाव होने से भर्ती परीक्षाओं में देरी होती रही है। इसी वजह से उप्र, बिहार, गुजरात, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों की तर्ज पर मप्र में भी अलग पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की तैयारी चल रही है।

