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राज्यसभा चुनाव विवाद पर कांग्रेस का हमला: ‘लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है मोदी सरकार

नई दिल्ली। मप्र राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त किए जाने के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग और रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) मुख्यालय में आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में पार्टी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।

प्रेस वार्ता को मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने संबोधित किया। इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक भी मौजूद रहे।

हरीश चौधरी ने कहा कि देश में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव कर सरकार ने उसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। उनके अनुसार, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन सभी नियमों के अनुरूप दाखिल किया गया था, फिर भी उसे निरस्त कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रिटर्निंग ऑफिसर की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बताते हुए कहा कि राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान उनका रवैया निष्पक्ष नहीं रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं और विधायकों द्वारा विरोध दर्ज कराने के बावजूद उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पटवारी ने कहा कि कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय चुनाव आयोग तक पहुंचा, लेकिन वहां भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण की स्थिति चिंताजनक है। उन्होंने दावा किया कि भारत धीरे-धीरे “इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी” की ओर बढ़ रहा है, जहां विपक्ष और मीडिया की स्वतंत्रता सीमित होती जा रही है। उन्होंने कार्यपालिका के बढ़ते केंद्रीकरण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर चिंता व्यक्त की।

राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने फॉर्म-26 में सभी आवश्यक जानकारियां पूरी पारदर्शिता के साथ दी थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस निजी शिकायत (प्राइवेट कंप्लेंट) का हवाला दिया जा रहा है, उस पर न्यायालय ने अभी तक संज्ञान नहीं लिया है और फॉर्म-26 में ऐसी जानकारी देने का कोई अनिवार्य प्रावधान भी नहीं है।

नटराजन ने कहा कि उनके नामांकन पत्र में कोई त्रुटि नहीं थी और न ही किसी तथ्य को छिपाया गया था। उन्होंने दावा किया कि नामांकन निरस्त किया जाना पूरी तरह अनुचित और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है।

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