नई दिल्ली: चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में शाह ने दावा किया कि कांग्रेस अगले 30 साल तक केंद्र की सत्ता में नहीं आ पाएगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष को चुनाव आयोग पर आरोप लगाने के बजाय जनता की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस की राजनीति पर उठाए सवाल?
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव जीतती है तो उसे चुनाव आयोग, मतदाता सूची और ईवीएम में कोई कमी नजर नहीं आती, लेकिन हारने के बाद इन्हीं संस्थाओं पर सवाल उठाए जाते हैं। उन्होंने केरल, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश सहित कई राज्यों का उदाहरण देते हुए विपक्ष के रवैये को दोहरा मापदंड बताया।
शाह ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सबसे महत्वपूर्ण होता है। राजनीतिक दलों को जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति के कारण जनता उससे लगातार दूर होती जा रही है।
राहुल गांधी के विदेश दौरे पर कसा तंज
गृहमंत्री ने राहुल गांधी के कथित विदेश दौरे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि वह खुद देश में रहकर जनता के बीच काम करते हैं और उन्हें हर 6 महीने में विदेश जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
शाह ने कहा कि राहुल गांधी अभी विदेश में हैं और शायद उनकी बात नहीं सुन पा रहे होंगे। उन्होंने कहा कि विदेश जाना उनका निजी मामला है, लेकिन भारत लौटकर उन्हें याद रखना चाहिए कि अगले 30 साल तक कांग्रेस का सत्ता में आना मुश्किल है।
बता दें कि हाल में कुछ मीडिया रिपोर्टों में राहुल गांधी के वियतनाम दौरे का दावा किया गया था। भाजपा ने सोशल मीडिया पर उनका एक कथित वीडियो भी शेयर किया था।
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दिल्ली के प्रदर्शन पर भी साधा निशाना
SIR और वोट चोरी के आरोपों पर दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर अमित शाह ने कहा कि भीड़ जुटाने से जनता का फैसला नहीं बदलता। चुनाव जीतने के लिए पार्टियों को लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याएं समझनी होंगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा के बूथ कार्यकर्ता से लेकर पीएम मोदी तक सभी जनता के बीच रहकर काम करते हैं। कांग्रेस को भी विरोध के साथ-साथ उन राज्यों में लोगों के लिए काम करना चाहिए, जहां उसकी सरकार है।
अमित शाह के इस बयान के बाद SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव और बढ़ सकता है। कांग्रेस वोटर लिस्ट और चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, तो भाजपा इसे चुनावी हार से जोड़कर पलटवार कर रही है।

