भोपाल: मध्यप्रदेश में अगले नगरीय निकाय चुनाव से पहले राज्य सरकार ने चुनाव से जुड़े कई नियमों में बदलाव किया है। महापौर, नगरपालिका अध्यक्ष और पार्षद पद का चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों के लिए जमानत राशि बढ़ाने के साथ नामांकन और चुनावी खर्च से जुड़े नियमों में भी संशोधन किया गया है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन किया है। नए प्रावधानों के तहत महापौर पद के उम्मीदवार को अब 32 हजार रुपए, जबकि नगरपालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को 24 हजार रुपए जमानत राशि जमा करनी होगी। नगर परिषद अध्यक्ष के लिए जमानत राशि 16 हजार रुपए निर्धारित की गई है।
नामांकन के लिए मिलेंगे कम से कम 7 दिन
नए नियमों में नामांकन की समय-सीमा भी स्पष्ट की गई है। चुनाव की सूचना प्रकाशित होने के सातवें दिन को नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख माना जाएगा। यदि सातवें दिन सार्वजनिक अवकाश रहता है तो उम्मीदवार अगले कार्यदिवस तक अपना नामांकन जमा कर सकेंगे। यानी नामांकन प्रक्रिया के लिए सात दिन से कम का समय नहीं रखा जाएगा।
एक ही पद के लिए किसी उम्मीदवार की ओर से एक से अधिक नामांकन-पत्र दिए जाने की स्थिति में अतिरिक्त नामांकन-पत्र स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता जरूरी
महापौर, नगरपालिका और नगर परिषद अध्यक्ष के साथ पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनाव से जुड़े लेन-देन के लिए अलग बैंक खाता रखना होगा। नामांकन दाखिल करते समय इस खाते की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। चुनाव से जुड़ी प्राप्तियों और खर्च का रिकॉर्ड इसी खाते के जरिए रखा जाएगा।
नामांकन से मतगणना तक देना होगा खर्च का हिसाब
उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने से लेकर मतगणना तक हुए चुनावी खर्च का पूरा लेखा रखना और निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तुत करना होगा। खर्च से संबंधित दस्तावेज भी सुरक्षित रखने होंगे।
निर्धारित समय में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है और उसे निर्धारित अवधि के लिए चुनाव लड़ने से निरर्हित किया जा सकता है।
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महापौर-अध्यक्ष को वापस बुलाने के नियम भी शामिल
संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने से जुड़ी प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है। इसके लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1956 के संबंधित प्रावधानों के साथ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
वहीं, महापौर, अध्यक्ष या पार्षद का पद मृत्यु, इस्तीफे, निर्वाचन रद्द होने या किसी अन्य कारण से खाली होता है तो इसकी जानकारी तय समय-सीमा में संबंधित निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।

