भोपाल: राजधानी के कलियासोत डैम किनारे 24 पेड़ काटने की अनुमति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बिजली के टॉवर लगाने के लिए नगर निगम ने यह अनुमति दी है, लेकिन पर्यावरणविदों ने इसे बाघों के भ्रमण क्षेत्र के लिए खतरा बताते हुए आपत्ति जताई है।
इलाके को बाघों का भ्रमण क्षेत्र बताया
पर्यावरणविद् राशिद नूर के मुताबिक, कलियासोत डैम के डूब क्षेत्र, खुशीलाल अस्पताल के पीछे और चंदनपुरा का इलाका बाघों का भ्रमण क्षेत्र है। उनका आरोप है कि अनुमति में गलत पता दर्ज कर नियमों के विरुद्ध पेड़ काटने की मंजूरी दी गई है। उन्होंने नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार से अनुमति तत्काल निरस्त करने की मांग की है। अब देखना होगा कि नगर निगम इस आपत्ति पर क्या कार्रवाई करता है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत चिंताजनक एवं घातक
नूर ने बताया कि नगर निगम की उद्यान शाखा ने मप्र पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा टॉवर लगाने के लिए अनुमति दी है, जो पर्यावरण, जल स्रोतों और वन्यजीवों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत चिंताजनक एवं घातक हैं।
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पूर्व में भी कटाई पर रोक लगाई गई थी
पर्यावरणविद् नूर ने बताया कि चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र (13 शटर) के पास टॉवर निर्माण का कार्य चल रहा है। वहां मौजूद इंजीनियर से अनुमति पत्र मांगा गया, तो उन्होंने जो अनुमति पत्र दिखाया उसमें कार्यस्थल का पता चंदनपुरा बाघ भ्रमण क्षेत्र न दर्शाकर खुशीलाल अस्पताल के पीछे एवं कलियासोत बांध का डूब क्षेत्र अंकित किया गया था।
जहां यह पेड़ काटे जा रहे हैं, वह पूरा क्षेत्र सघन वन क्षेत्र है और अति-संवेदनशील बाघ भ्रमण क्षेत्र के अंतर्गत आता है। पूर्व में भी वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र में चल रहे कार्यों और कटाई पर रोक लगाई गई थी। ऐसे सघन वन एवं संवेदनशील क्षेत्र के लिए अनुमति पत्र में गलत पता डालकर कार्य करना एक बहुत बड़ा संशय पैदा करता है।

