वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर दबाव बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में पेश एक बिल में भारत, चीन समेत पांच देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस सूची में भारत और चीन के अलावा हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान भी शामिल हैं। अगर यह बिल कानून बनता है, तो इन देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर भारी शुल्क लगाया जा सकता है।
रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति
इस प्रस्ताव का उद्देश्य रूस के ऊर्जा कारोबार पर दबाव बनाना और उसकी आर्थिक ताकत को कमजोर करना बताया जा रहा है। बिल में रूस की ऊर्जा कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और रक्षा क्षेत्र पर नए प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ का प्रस्ताव था, जिसे बाद में घटाकर 100% कर दिया गया।
रूस से तेल खरीद में भारत सबसे आगे
भारत रूस से कच्चे तेल का बड़ा खरीदार बना हुआ है। जून 2026 में भारत ने रूस से करीब 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का लगभग 52.4% था।मई की तुलना में जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
बिल को मिला दोनों दलों का समर्थ
सीनेट में पेश इस बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के कई सांसदों का समर्थन मिला है। हालांकि, इसे कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की जरूरत होगी।यह बिल रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था।
अब नजर इस बात पर है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी संसद में कितना आगे बढ़ता है और इसका भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर क्या असर पड़ता है।

